
बैंगलुरु। कांग्रेस शासित कर्नाटक (Congress ruled Karnataka) में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) के ताजा बयानों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं। राज्य में हुए विधानसभा चुनाव (Assembly Elections.) के बाद कथित तौर पर तय हुआ था कि ढाई साल में सीएम बदले जाएंगे। फिलहाल, इस दौड़ में सबसे आगे उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Deputy Chief Minister DK Shivakumar) नजर आ रहे हैं।
गुरुवार को सिद्धारमैया के बयानों से पहली बार संकेत मिले हैं कि उनके और डिप्टी सीएम शिवकुमार के बीच बातचीत हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘अंत में आलाकमान को ही हर बात पर फैसला लेना है।’ पत्रकारों ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सवाल किया था, जिसका उत्तर सिद्धारमैया ने दिया था।
दरअसल, इस बयान को उनके पूर्व की टिप्पणियों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ओर जहां वह पहले पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की बात कहते थे और नेतृत्व परिवर्तन की खबरों का खंडन करते थे। इधर, शिवकुमार ने हाल ही में कहा कि वह अपना ‘कर्तव्य करेंगे।’ साथ ही कहा कि नेतृत्व को लेकर फैसला पार्टी करेगी। हालांकि, रेस में कई और नेता भी दावेदारी पेश करते नजर आ रहे हैं।
साल 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी। तब कहा जा रहा था कि शिवकुमार सीएम पद के लिए जोर दे रहे हैं। ऐसे में पार्टी को हस्तक्षेप करना पड़ा और कथित तौर पर 30 महीनों का एक समझौता तैयार हुआ। अब सिद्धारमैया को पद पर रहते हुए 30 महीने पूरे होने जा रहे हैं। दोनों के ही समर्थक अपने-अपने नेताओं का नाम आगे बढ़ा रहे हैं।
क्या बोले शिवकुमार
शिवकुमार ने जैन आध्यात्मिक गुरु गुणाधर नंदी महाराज से मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद मिलने के बाद बुधवार को पार्टी के प्रति अपनी वफादारी दोहराई और शीर्ष पद के लिए किसी भी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को खारिज कर दिया। जैन गुरु के आशीर्वाद के बाद राज्य में कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं।
शिवकुमार ने हुबली हवाई अड्डे पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आध्यात्मिक नेता अपनी इच्छानुसार आशीर्वाद देने के लिए स्वतंत्र हैं, और हम इसका सम्मान करते हैं। हालांकि, पार्टी के फैसले सर्वोच्च हैं, और हम उनका पालन करेंगे।’
शिवकुमार की टिप्पणियों को वर्तमान में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के भीतर आंतरिक तनाव के बारे में अटकलों को शांत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से पार्टी के भीतर संभावित नेतृत्व परिवर्तन के बारे में चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
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