
नई दिल्ली। कोलंबो (Colombo)के आर प्रेमदासा स्टेडियम(RPremadasaStadium) की ताजा पिच ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि यहां मुकाबला तेज गेंदबाजों से ज्यादा स्पिनरों के इर्दगिर्द घूमेगा। हाल ही में ICC Men’s T20 World Cup के एक मैच में जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया(Zimbabwe beat Australia) को धीमी गेंदों और सटीक लाइन लेंथ के दम पर चौंका दिया। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि जो भी टीम स्पिन के जाल को बेहतर तरीके से बिछाएगी वही बाजी मारेगी। अब निगाहें भारत और पाकिस्तान (INDvsPAK)के हाई वोल्टेज मुकाबले पर टिक गई हैं जहां मिस्ट्री स्पिनर निर्णायक(Mystery spinner decisive ) भूमिका निभा सकते हैं।
भारत के पास सबसे बड़ा हथियार वरुण चक्रवर्ती हैं। पिछले एक साल में उन्होंने अपनी गेंदबाजी में जबरदस्त बदलाव किया है। इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान उन्होंने साइडस्पिन के साथ ओवरस्पिन का इस्तेमाल बढ़ाया जिससे उनकी गेंदों में अतिरिक्त उछाल और भ्रम पैदा हुआ। लगभग 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालने वाले वरुण लेंथ पर खास नियंत्रण रखते हैं। यही वजह है कि बल्लेबाज न तो आसानी से बैकफुट पर जाकर पुल खेल पाते हैं और न ही आगे बढ़कर बड़े शॉट लगा पाते हैं। उनकी गेंदें बल्लेबाज के मन में संशय पैदा करती हैं और यही संशय विकेट दिलाता है। खासतौर पर बाबर आजम जैसे बल्लेबाज जो बीच के ओवरों में पारी संभालते हैं उनके लिए वरुण की विविधता चुनौती बन सकती है।
पाकिस्तान के पास भी जवाबी वार के लिए मजबूत हथियार मौजूद हैं। उस्मान तारिक अपनी अनोखी पॉज एंड स्लिंग शैली से पहले ही चर्चा में हैं। उनका एक्शन कुछ हद तक श्रीलंका के पूर्व दिग्गज लसिथ मलिंगा की याद दिलाता है। गेंद हाथ से निकलते समय बल्लेबाज की आई लाइन से नीचे रहती है जिससे उसे पढ़ना मुश्किल हो जाता है। तारिक की खासियत सिर्फ एक्शन नहीं बल्कि बल्लेबाज को पढ़ने की क्षमता भी है। वे गति में सूक्ष्म बदलाव और लंबाई के सटीक इस्तेमाल से बल्लेबाज को गलती के लिए मजबूर करते हैं।
अबरार अहमद को भले कुछ लोग कम आंकते हों लेकिन आंकड़े उनके असर को बयां करते हैं। 27 वर्षीय लेग स्पिनर गुगली और कैरम बॉल के दम पर बल्लेबाजों को चौंकाते हैं। उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेटों का बड़ा हिस्सा इन्हीं विविधताओं से आया है। प्रेमदासा जैसी पिच जहां गेंद रुककर आती है वहां अबरार की धीमी गुगली और टर्न बल्लेबाजों के लिए जाल साबित हो सकती है।
कोलंबो का ट्रैक पारंपरिक रूप से स्पिनरों को मदद देता रहा है। यहां सफलता की कुंजी सिर्फ टर्न नहीं बल्कि सही लेंथ है। अगर गेंद सही जगह गिरे तो पिच खुद उसे धार दे देती है और बल्लेबाज या तो बोल्ड होता है या पगबाधा। ऐसे में भारत और पाकिस्तान दोनों की रणनीति मिडिल ओवरों में स्पिन से शिकंजा कसने की होगी।
इस महामुकाबले में रनों की बारिश से ज्यादा गेंद की पकड़ और दिमागी खेल अहम होगा। जो स्पिनर दबाव को बेहतर तरीके से संभालेगा वही टीम को जीत के करीब ले जाएगा। कोलंबो की घूमती सतह पर इस बार असली जंग बल्ले और गेंद की नहीं बल्कि धैर्य और चतुराई की होगी।
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