
वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत का संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण इस्राइल के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की ओर आगे बढ़ रहा है। एक प्रतिष्ठित अमेरिकी थिंक-टैंक ‘मिडिल ईस्ट फोरम’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में भारत और इस्राइल के बीच रणनीतिक साझेदारी में लगातार वृद्धि हुई है, जो सीमित राजनयिक आदान-प्रदान से शुरू होकर सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के एक मजबूत रिश्ते में बदल गई है।
दोनों देशों के बीच आतंकवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर साझा चिंताएं उनके रिश्तों को और प्रगाढ़ करने में मददगार रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए इस्राइल ने रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वहीं, नई दिल्ली ने अपनी व्यापक पश्चिम एशिया रणनीति के तहत अरब देशों के साथ भी अपने मजबूत संबंध बनाए रखे हैं।
समय के साथ भारत और इस्राइल के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है। इसमें खुफिया जानकारी साझा करना, मिसाइल सिस्टम, निगरानी तकनीक और आतंकवाद विरोधी प्रयासों जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रक्षा नवाचार, साइबर सुरक्षा और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी में अपनी नेतृत्व क्षमता के साथ, इस्राइल भारत के लिए एक अनिवार्य भागीदार के रूप में उभरा है।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर 2025 में हस्ताक्षरित संयुक्त विकास और सह-उत्पादन पर एक समझौता ज्ञापन है। यह बदलाव दोनों देशों के रणनीतिक हितों को दर्शाता है। इस्राइल के लिए भारत के साथ सहयोग उसे अपनी साझेदारी में विविधता लाने और अस्थिर क्षेत्रीय माहौल में अपनी कमजोरियों को कम करने में मदद करता है। वहीं, भारत के लिए यह ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के तहत विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के उसके प्रयासों के अनुरूप है।
सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अब इस रिश्ते के मुख्य स्तंभ बन गए हैं। इस्राइल अब भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा भागीदारों में से एक है। खुफिया सहयोग, आतंकवाद विरोधी रणनीतियां और सीमा सुरक्षा प्रौद्योगिकी भी महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, क्योंकि दोनों देश शत्रुतापूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
पिछले 10 वर्षों में भारत ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ भी अपनी भागीदारी को गहरा किया है। कई खाड़ी देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार में उनकी भूमिका के लिए अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया है।
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