ब्‍लॉगर

संवेदन प्रत्येक चेतन या जीव का स्वभाव

– हृदयनारायण दीक्षित रस जीवन का प्रवाह है। हम रस अभीप्सु हैं और रस जिज्ञासु भी। अथातो रस जिज्ञासा। बातें भी रस पूर्ण होती हैं लेकिन द्रव्य या वस्तु नहीं होतीं। आनंदहीन बातचीत नीरस कही जाती है। बातों का रस बतरस कहा जाता है। रसभाव से भरेपूरे वाक्य काव्य हो जाते हैं। रस अनुभूति भाव […]