देहरादून । चमोली आपदा पर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक कालाचंद साईं ने सोमवार को कहा है कि अभी तक जानकारी के मुताबिक उस क्षेत्र में ग्लेशियर लेक नहीं है। आपदा के कारणों के अध्ययन के लिए इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक जोशीमठ पहुंच गए हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लेशियर (Glacier) उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शून्य तापमान में होते हैं। अगर ग्लेशियर से बनी लेक से पानी नीचे आता है तो उसका बहाव बहुत तेज होगा। उसके बहाव में आने वाली हर चीज बह जाएगी। ऐसी आपदायें रात में होती हैं तो उससे काफी नुकसान होता है। केदार घाटी में प्राकृतिक आपदा रात को हुई थी। इस वजह से लोगों को बचने का मौका नहीं मिला। एजेंसी
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved