
नई दिल्ली। हॉल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की धमक पूरी दुनिया में सुनाई पड़ी थी। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के साहस ने भारतीयों का सिर गौरव से आसमान पर पहुंचा दिया था। अब उसी सेना के हाथ और मजबूत होने जा रहे हैं। भारतीय वायु सेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ फरवरी 2021 में 83 तेजस Mk 1A विमानों का सौदा 48 हजार करोड़ रुपए में किया था। इनकी डिलीवरी मार्च, 2024 में होनी थी, लेकिन इंजन की सप्लाई में देरी की वजह से डिलीवरी अभी तक नहीं हो सकी। कंपनी ने दावा किया है कि जून के अंत तक फाइटर प्लेन की डिलेवरी शुरू हो जाएगी।
तेजस Mk 1A लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LAC) है। अपनी कैटेगरी में सबसे हल्का होने के साथ-साथ सबसे छोटा भी है। यह प्लेन 1.8 मैक स्पीड यानी 2205 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से फर्राटा भरेगा। मैक (Mach) एक इकाई है जिसका उपयोग किसी वस्तु की गति को ध्वनि की गति के सापेक्ष मापने के लिए किया जाता है। एक मैक संख्या 1 का मतलब है कि वस्तु ध्वनि की गति से यात्रा कर रही है, 2 का मतलब है कि यह ध्वनि की गति से दोगुनी गति से यात्रा कर रही है।
तेजस Mk 1A में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) आधुनिक रडार है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने में सक्षम है। इसकी सटीकता उच्च स्तर की होती है। बीम को बहुत तेजी से स्कैन करता है। इस रडार का प्रयोग लड़ाकू विमान के अलावा जहाज, हवाई रक्षा और मौसम रडार में भी किया जाता है। भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बीच 180 तेजस Mk 1A की डील हुई थी। पहली खेप में 83 और दूसरी खेप में 97 फाइटर वायुसेना के बेड़े में शामिल होने हैं। एक विमान की कीमत करीब 315 करोड़ रूपये (43 मिलियन डॉलर) है।
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