
इंदौर। एक तरफ अभी नगर निगम ने चंदन नगर – कालानी नगर सडक़ को ना सिर्फ मास्टर प्लान में शामिल करवाया, बल्कि उसकी चौड़ाई भी 60 फीट निर्धारित करवाई और लगभग 350 बाधक मकानों को तोडऩे की बात भी सामने आई, जिसको लेकर क्षेत्रीय रहवासियों ने विरोध भी शुरू कर दिया। एक तरफ निगम ने मास्टर प्लान में ये 42वीं सडक़ जुड़वाई, तो दूसरी तरफ 50 साल पुरानी जो सडक़ें मास्टर प्लान में शामिल हैं उनकी चौड़ाई घटाने का राजनीतिक खेल पिछले कई महीनों से चल रहा है। बार-बार नपती, सेंट्रल लाइन का विवाद और बाधक निर्माणों को बचाने के इस खेल के चलते एक भी सडक़ पूरी नहीं हुई, जबकि एक दर्जन से अधिक सडक़ों के जोर-शोर से भूमिपूजन नगर निगम कर चुका है।
विशेष केन्द्रीय सहायता के तहत इंदौर में इन 23 सडक़ों के लिए 468 करोड़ रुपए से अधिक की राशि निगम को प्राप्त हुई है और चार पैकेजों में निगम ने इन 34 किलोमीटर लम्बाई की सडक़ों के ठेके भी दे दिए और दावा किया कि इस साल 7 से 8 सडक़ों का निर्माण पूरा कर दिया जाएगा। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने इन सडक़ों के निर्माण की धीमी गति को लेकर जिम्मेदारों को फटकार लगाई और साथ ही पैकेज-1 का ठेका लेने वाली विक्टोरी वन प्रोजेक्ट फर्म को टर्मिनेट करने का नोटिस जारी करने का निर्देश भी दिया। इसी तरह पैकेज-2 की ठेकेदार एजेंसी एसकेएस इन्फ्रा प्रोजेक्ट आगरा को भी समय सीमा में कार्य पूरा करने, तो पैकेज-3 की ठेकेदार एजेंसी की हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर की कंसल्टेंट ग्लोबल इन्फ्रा सॉल्यूशंस को टर्मिनेट करने के निर्देश भी दिए और पैकेज-4 की ठेकेदार एजेंसी पीडी अग्रवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी काम की गति बढ़ाने को कहा। अभी पिछले दिनों महापौर ने चंदन नगर-कालानी नगर रोड की चौड़ाई 60 फीट होने और मास्टर प्लान में इसे शामिल करने की कार्रवाई को गेमचेंजर बताया, मगर दूसरी तरफ जो 50 साल पुरानी सडक़ें मास्टर प्लान में शामिल हैं उनकी चौड़ाई घटाने का दबाव क्षेत्रीय पार्षदों और अन्य नेताओं द्वारा बनाया जाता रहा है।
हालांकि इन सडक़ों की समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी स्पष्ट बोल चुके हैं कि किसी भी सडक़ की चौड़ाई नहीं घटाई जाएगी, लेकिन दूसरी तरफ छावनी, सुभाष मार्ग, खजराना सहित अन्य सडक़ों की चौड़ाई को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता रहा है और छावनी में बार-बार नपती भी कराई जा रही है। कभी सेंट्रल लाइन यानी रोड अलाइनमेंट को लेकर आपत्ति उठाई जाती है, तो कभी बाधक निर्माणों को बचाने और सडक़ की चौड़ाई 80 फीट से 60 फीट करने की मांग होती है। जबकि ये सभी सडक़ें मध्य शहर की अत्यंत महत्वपूर्ण और यातायात के घने दबाव वाली है। जब इन सडक़ों के निर्माण की राशि नगर निगम को केन्द्र से प्राप्त हो गई है और इनका चौड़ीकरण भी एक बार में ही संभव है। भविष्य में अगर चौड़ाई घटाकर सडक़ बना दी तो फिर से दोनों तरफ निर्माण हो जाएंगे और फिर अगली बार तोडफ़ोड़ या चौड़ाई बढ़ाना संभव नहीं होगा। या तो नगर निगम इन सडक़ों को वैसा ही छोड़ दे या मास्टर प्लान की निर्धारित चौड़ाई के मुताबिक निर्माण करवाए। शहर के यातायात विशेषज्ञों का भी मानना है कि दिनभर जो जाम की स्थिति इन सभी सडक़ों पर रहती है उसके चलते अधिक से अधिक चौड़ाई होना चाहिए, तो उसकी बजाय जनप्रतिनिधि चौड़ाई घटवाने पर अड़े हुए हैं। मजे की बात यह है कि नगर निगम ने हाईकोर्ट में इन सडक़ों को लेकर केविएट भी दायर कर रखी है। पहले सभी 23 सडक़ों को लेकर हाईकोर्ट में केविएट दायर की, ताकि एकतरफा स्टे या कानूनी बाधा ना हो, तो दूसरी तरफ अभी पिछले दिनों ही 19 सडक़ों को लेकर भी नए सिरे से केविएट दायर की गई। अभी हालांकि छावनी में 80 फीट के हिसाब से नोटिस जारी किए गए हैं।
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