
उज्जैन। शिप्रा नदी में बारिश के समय उफान आ जाता है और सालभर कालियादेह महल के पीछे शिप्रा नदी सूखी रहती है लेकिन ्रबारिशके दिनों में यहाँ झरने जैसा नजारा बन जाता है लेकिन यहाँ पर खतरनाक स्थिति हैं और हर साल मौतें होती है…इस बार भी लोग बड़ी संख्या में लोग केडीगेट पहुँच रहे हैं जिनमें नई उम्र के युवा भी हैं और पुलिस द्वारा कोई व्यवस्था की गई है और न ही डेंजर झोन में नहाने से रोका जा रहा है। जबकि यहाँ शनिवार, रविवार एवं छुट्टी के दिनों में पुलिस लगाई जाना चाहिए जबकि तैराक जरूरी है।
वर्षाकाल को छोड़कर कालियादेह महल क्षेत्र में स्नान पर्वों पर ही लोगों की भीड़ नजर आती है। लेकिन एक बार फिर यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, उफनते बावन कुंड और झरने के दृश्य शहरवासियों और पर्यटकों को फिर से लुभाने लगे हैं। वीकेंड के दिनों में यहाँ पूरे वर्षाकाल में लोगों की भीड़ रहेगी और वे यहाँ सैर सपाटा और पिकनित करने आएँगे। सिंधिया काल में निर्मित प्राचीन कालियादेह महल अनदेखी के चलते जर्जर होता जा रहा है। इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने के दावे तो कई बार किए गए लेकिन इस ओर अभी तक शासन प्रशासन तथा पर्यटन विभाग ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। कालियादेह महल के ठीक सामने प्राचीन बावन कुंड भी है। पूरे साल इनमें पानी रहता है लेकिन वर्षाकाल में जब शिप्रा नदी में उफान आता है तो कालियादेह महल के सामने की ओर मौजूद यह कुंड भी लबालब हो जाते हैं और उफनते हुए कुंड से झरने गिरते प्रतीत होते हैं।
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