
विदेशी मीडिया ने लिखा- चमकती सड़कों के नीचे ‘सड़ा हुआ सिस्टम’
ग्लोबल केस स्टडी: लंदन से लेकर सिंगापुर तक की मीडिया ने इंदौर की घटना को ‘शहरी प्रबंधन की विफलता’ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
अनसुनी चेतावनी: विदेशी अखबारों का सवाल- जब जनता महीनों से चिल्ला रही थी, तो किस नींद में सो रहा था ‘नंबर-1’ प्रशासन?
ब्रांड को बट्टा: स्वच्छता के वैश्विक मंच पर इंदौर की छवि धूमिल; ‘टॉक्सिक टैप्स’ (जहरीले नल) शब्द का इस्तेमाल कर उड़ाया मजाक।

इंदौर. देश (India) का सबसे स्वच्छ शहर (Clean city) और अर्बन मैनेजमेंट का ‘ग्लोबल पोस्टर बाय’ (Global Poster Buy) माना जाने वाला (Indore) इंदौर आज अपनी सबसे शर्मनाक त्रासदी के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। भागीरथपुरा में दूषित पानी (सीवेज मिश्रित जल) पीने से हुई मौतों ने न केवल मध्य प्रदेश के ‘सिस्टम’ की कलई खोल दी है, बल्कि ‘ब्रांड इंदौर’ पर एक ऐसा बट्टा लगाया है जिसकी गूंज वाशिंगटन, लंदन से लेकर बीजिंग और इस्लामाबाद तक सुनाई दे रही है। यह हादसा अब केवल एक स्थानीय खबर नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल केस स्टडी’ बन गया है कि कैसे ऊपर से चमकती ‘स्मार्ट सिटी’ जमीन के नीचे खोखली साबित हो सकती है और कैसे एक सड़ी हुई पाइपलाइन पूरे शहर को ‘शवगृह’ में बदल सकती है।
विश्व मीडिया का तीखा सवाल: ‘सिस्टम’ हत्यारा क्यों बना?
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार ‘द गार्जियन’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के सबसे साफ शहर में कम से कम 10 मौतों का जिम्मेदार पीने के पानी में मिला सीवेज है। विदेशी मीडिया का सबसे चुभने वाला सवाल यह है कि जब भागीरथपुरा के रहवासी महीनों से बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, तो प्रशासन किस गुमान में था? रायटर्स और एएफपी जैसी वैश्विक एजेंसियों ने इसे सीधे तौर पर ‘प्रशासनिक विफलता’ और ‘मानवाधिकार संकट’ करार दिया है। वहीं, सिंगापुर और खाड़ी देशों की मीडिया रिपोर्ट्स में यह बुनियादी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भारत का शहरी विकास अपने ही नागरिकों की जान की कीमत पर किया जा रहा है?
बाक्स: दुनिया भर में फजीहत: इंदौर पर किसने क्या लिखा
विदेशी मीडिया ने इंदौर के ‘नंबर-1’ तमगे और जमीनी हकीकत के विरोधाभास पर जमकर प्रहार किया है:
ब्रिटेन और यूरोप
द गार्जियन (ब्रिटेन): चेतावनी के बाद भी नहीं चेता प्रशासन, भारत के ‘क्लीनेस्ट सिटी’ में पानी बना जहर।
डेली सबाह (यूरोप): इंदौर जल संकट: 9 मृत, 200 से अधिक अस्पताल में; प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में।
अमेरिका और ग्लोबल एजेंसी
रायटर्स (अमेरिका/ग्लोबल): भारत के ‘क्लीनेस्ट सिटी’ में मौतों से गुस्सा, जल सुरक्षा पर लगा प्रश्नचिन्ह।
बैरन्स (अमेरिका): इंदौर जल संकट ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खोली; बुनियादी खामियां उजागर।
एसोसिएटेड प्रेस (एपी): दूषित पानी से मध्य भारत में कोहराम, मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस।
एशिया और खाड़ी देश
गल्फ न्यूज़ (यूएई): भारत का सबसे साफ शहर, लेकिन नल जहरीले; इंदौर जल संकट में 7 की मौत।
द स्ट्रेट्स टाइम्स (सिंगापुर): दूषित पानी से इंदौर में मौतें; शहरी प्रबंधन की विफलता सामने आई।
सीएनए (सिंगापुर): पाइपलाइन के ऊपर अवैध निर्माण और अनदेखी बनी जानलेवा, भारत में जल सुरक्षा पर उठे सवाल।
ग्लोबल हेल्थ वाच: स्मार्ट सिटी का विरोधाभास: सीवेज रिसाव ने फैलाया मौत का संक्रमण।
पड़ोसी मुल्क (चीन और पाकिस्तान)
शिन्हुआ (चीन): मध्य भारत में प्रदूषित जल से 3 की मौत, 150 बीमार; भारत के बुनियादी ढांचे पर सवाल।
डान (पाकिस्तान): भारत के इंदौर में दूषित पानी ने ली 9 लोगों की जान, 200 अस्पताल में भर्ती; सिस्टम फेल।
अरब न्यूज़ (पाकिस्तान संस्करण): इंदौर शहर में गंदा पानी पीने से फैली महामारी, अस्पतालों में मरीजों की कतारें।
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