
नई दिल्ली: ईरान (Iran) के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका (America) ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को ‘तुरंत’ देश छोड़ने की चेतावनी दी है. ईरान में ‘वर्चुअल अमेरिकी दूतावास’ (Virtual US Embassy) द्वारा जारी इस एडवाइजरी में अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वे देश छोड़ने की ऐसी योजना बनाएं जो अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न हो, क्योंकि पूरे देश में अशांति है.
एडवाइजरी में सुझाव दिया गया है कि अगर हवाई उड़ानें रद्द होती हैं तो नागरिक जमीन के रास्ते आर्मेनिया या तुर्की की सीमा पार कर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचें. अमेरिका को अंदेशा है कि ईरान में कभी भी इंटरनेट पूरी तरह ठप किया जा सकता है जिससे संपर्क करना नामुमकिन हो जाएगा. ऐसे में नागरिकों को पर्याप्त खाना, पानी और दवाइयां जमा करने और किसी सुरक्षित इमारत के अंदर ही रहने को कहा गया है. खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है जिनके पास अमेरिका और ईरान दोनों की नागरिकता है क्योंकि ईरान उन्हें केवल अपना नागरिक मानकर गिरफ्तार कर सकता है.
ट्रंप की समुद्री सेना ‘अर्माडा’ खाड़ी में तैनात
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जुबानी जंग अब हमले की धमकी तक पहुंच गई है. ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में अपना विशाल समुद्री बेड़ा जिसे ‘अर्माडा’ कहा जा रहा है उसे तैनात कर दिया है. इसमें विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई घातक युद्धपोत शामिल हैं जो जनवरी के अंत से ही वहां डटे हुए हैं. एक इंटरव्यू के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चिंता करनी चाहिए तो ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें बहुत ज्यादा चिंतित होना चाहिए. अमेरिका का कहना है कि ईरान में दिसंबर 2025 से चल रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई हिंसा का जवाब दिया जाएगा.
युद्ध टालने के लिए तुर्की की बड़ी कोशिश
मिडिल ईस्ट में एक नए युद्ध को रोकने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगान पूरी ताकत लगा रहे हैं. अमेरिका चाहता है कि बातचीत में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल किया जाए जबकि ईरान केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर ही चर्चा करना चाहता है. इसी जिद्द के कारण दोनों देशों के बीच समझौता टूटने की कगार पर है जिससे हवाई हमले का खतरा बढ़ गया है. एर्दोगान ने कहा है कि ओमान में होने वाली निचले स्तर की बातचीत के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को आपस में बात करनी चाहिए. तुर्की इस समय अमेरिका और ईरान के बीच कड़ी बनकर काम कर रहा है ताकि किसी भी तरह इस बड़े सैन्य टकराव को टाला जा सके.

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