
नई दिल्ली । महाराष्ट्र(Maharashtra) में ठाणे जिले के उल्हासनगर(Ulhasnagar in Thane district) में अस्पताल के डॉक्टर(hospital doctors) की ओर से मृत घोषित (pronounced dead)किया गया व्यक्ति उस समय जग गया, जब उसका परिवार उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था। परिजनों ने शनिवार को बताया कि पीलिया से पीड़ित अभिमन्यु तायडे को बेचैनी की शिकायत के बाद स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के डॉक्टर ने मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया। इसके बाद परिवार ने उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी, इसी दौरान अभिमन्यु तायडे जाग गए।
अस्पताल के एक डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन दावा किया कि उन्होंने मानवीय आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र दिया था, जब परिवार ने स्वयं बताया था कि तायडे की मौत हो गई है। तायडे का फिलहाल दूसरे अस्पताल में इलाज चल रहा है। हॉस्पिटल की लापरवाही के संबंध में क्या कार्रवाई की जाएगी, यह जानने के लिए उल्हासनगर नगर निगम के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
एम्बुलेंस उपलब्ध न होने कारण शिशु की मौत
वहीं, महाराष्ट्र के पालघर जिले के मोखाडा में एक महिला ने एम्बुलेंस उपलब्ध न होने के कारण गर्भ में ही अपने बच्चे को खो दिया। उसकी नाजुक हालत के कारण उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ा। महिला के परिजनों ने शनिवार को यह दावा किया। महिला के पति ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने घटना के बारे में जवाबदेही तय करने की मांग की तो पुलिस ने उनकी पिटाई कर दी। हालांकि, अधिकारियों ने इन दावों का खंडन किया है।
जोगलवाड़ी गांव की रहने वाली अविता कवार को 10 जून को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन 108 नंबर पर कॉल करने के बावजूद उसे एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। 11 जून को भी यही हुआ और नतीजा वही रहा, जिसके बाद उन्हें निजी वाहन से खोडाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां के डॉक्टरों ने पहले तो इलाज का आश्वासन दिया, लेकिन 3 घंटे बाद उन्होंने कहा कि उसे मोखाडा ग्रामीण अस्पताल में ले जाया जाए क्योंकि उसकी हालत गंभीर थी। 2 घंटे बाद जब आसे सब सेंटर से उसे लाने के लिए गाड़ी आई, तब तक गर्भ में ही भ्रूण की जान जा चुकी थी।
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