
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) द्वारा वीजा (Visa) और व्यापार पर थोपी गई बाधाओं का असर भारत (India) पर दिखने लगा है। इससे विदेशों से भारतीय (Indians) द्वारा भेजी जाने वाली रकम और निर्यात आय (Amount and Export earnings) पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को और कमजोर करने की आशंका बढ़ा दी है, जो पहले से ही ऐतिहासिक निचले स्तर के आसपास है।
ट्रंप लगातार दबाव बना रहे
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली रकम और भारत की निर्यात आय पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि ट्रंप दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने अचानक एच-1बी वीजा पर भारी शुल्क लगा दिया और रूसी तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त शुल्क सहित कुल 50% का टैरिफ लगा दिया। इससे भारत के चालू खाता संतुलन यानी निर्यात-आयात और धन प्रवाह के अंतर पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
घट सकता है विदेशों से आने वाला धन
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, भारत की सेवा निर्यात आय का बड़ा हिस्सा आईटी सेवाओं से आता है। इसके अलावा, विदेश में काम करने वाले भारतीय बड़ी मात्रा में पैसा भारत भेजते हैं। अगर आईटी कंपनियां वीजा शुल्क और बाधाओं के कारण कम भारतीयों को अमेरिका भेजती हैं, तो विदेशों से आने वाला धन घट सकता है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत के लिए अमेरिका विदेश से आने वाले धन का सबसे बड़ा स्रोत है, जो इस साल मार्च तक ऐसी प्राप्ति का लगभग 27.7% है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (19.2%) और ब्रिटेन (10.8%) आते हैं। जून तिमाही में रेमिटेंस बढ़कर 33.2 अरब डॉलर पहुंच गए, जो पिछले साल की समान तिमाही में 28.6 अरब डॉलर थे।
विदेशी निवेशकों की तेज बिकवाली
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 16.9 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की है, जबकि 2024 में उन्होंने 124 मिलियन डॉलर की मामूली खरीदारी की थी। केयरएज रेटिंग्स ने 24 सितम्बर की अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन चिंताओं का असर विदेशी निवेश प्रवाह पर पड़ रहा है।
अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, लेकिन ट्रंप के कदमों से भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होने की आशंका है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन का अनुमान है कि इन कदमों से वित्त वर्ष 2026 में भारत की विकास दर पर 0.5 प्रतिशत अंक का असर पड़ेगा, हालांकि उन्होंने 6.3 से 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है। वहीं, केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि अगर 50 प्रतिशत शुल्क जारी रहे तो भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2026 में लगभग छह प्रतिशत रह सकती है, जबकि सामान्य अनुमान 6.5 प्रतिशत है (यह मानते हुए कि शुल्क 15 से 20 प्रतिशत पर आ जाएगा)।
रुपये पर लगातार दवाब बढ़ेगा
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में भारत की शुद्ध सेवा आय बढ़कर 47.9 अरब डॉलर हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 39.7 अरब डॉलर थी। इसमें सबसे बड़ा योगदान सॉफ्टवेयर सेवाओं का रहा, जो 41.5 अरब डॉलर तक पहुंचा। सबनवीस के अनुसार, अगर आउटसोर्सिंग पर असर पड़ा तो सेवाओं से होने वाला निर्यात घट सकता है। अभी चालू खाते पर तत्काल दबाव नहीं है, लेकिन अगले एक साल में असर दिख सकता है और रुपये पर और दबाव पड़ेगा।
कितना नीचे जा सकता है रुपया
रुपया अप्रैल से लगातार कमजोर हो रहा है। अप्रैल में जब ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगाए थे, तब रुपया डॉलर के मुकाबले 85.5 पर था, जो 26 सितम्बर तक गिरकर 88.7 पर पहुंच गया। एक निजी बैंक के विशेषज्ञ ने कहा कि ट्रंप की नीतियों का असर फिलहाल पूरी तरह आंकना मुश्किल है, लेकिन एच-1बी वीजा से स्थिति और कठिन हो गई है। पूंजी खाता पहले से ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव में था और यह तब तक जारी रह सकता है, जब तक शेयर बाजार में सुधार नहीं आता। रुपया 89 से 89.25 तक भी जा सकता है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक को दखल देना पड़ सकता है।
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