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1450 वर्ग किलोमीटर और बढ़ गया इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन

February 04, 2026

– 16 हजार वर्ग किलोमीटर का रहेगा, अब आधा दर्जन जिलों का शामिल किया एरिया
– 5वींं मर्तबा बढ़ाया गया है रीजन का क्षेत्रफल
– भोपाल एरिया में शामिल शुजालपुर और कालापीपल अब इंदौर में जुड़े
– दिल्ली एनसीआर और लखनऊ के बाद तीसरा सबसे बड़ा हुआ एरिया
– प्राधिकरण द्वारा नियुक्त कंसल्टेंट फर्म को नए सिरे से करना होगा सर्वे और सीमांकन
– मेट्रोपॉलिटन रीजन के चक्कर में ही अटका है इंदौर का मास्टर प्लान

इंदौर। धीरे-धीरे कर इंदौर (Indore) मेट्रोपॉलिटन रीजन (Metropolitan Region) का क्षेत्रफल बढ़ता ही जा रहा है। अब पांचवीं मर्तबा (fifth time) हुए बदलाव के चलते लगभग 1450 वर्ग किलोमीटर (1450 square kilometers) का एरिया और इसमें शामिल करने का निर्णय लिया गया, जिसके चलते अब कुल 16 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल हो जाएगा, जिसमें आधा दर्जन जिलों की तहसीलें शामिल रहेंगी। भोपाल रीजन में शामिल शुजालपुर और कालापीपल तहसील को भी अब इंदौर रीजन में शामिल कर लिया है। प्राधिकरण अब इस बढ़े हुए एरिया के मुताबिक कंसल्टेंट फर्म से सर्वे-सीमांकन की प्रक्रिया करवाएगा।



  • इंदौर का मास्टर प्लान भी इसी कारण अटका हुआ है, क्योंकि शासन उसके पहले इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन को अमल में लाना चाहता है। इसी के साथ भोपाल रीजन का भी काम चल रहा है। मगर इंदौर मेट्रो पॉलिटन रीजन में लगातार क्षेत्रफल बढ़ रहा है। पिछले दिनों 14550 वर्ग किलोमीटर का एरिया लगभग तय हो गया था और यह उम्मीद थी कि इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विकास कार्यों से जुड़ी जो बैठक बुलाई थी, उसी में मेट्रोपॉलिटन रीजन की घोषणा के साथ अधिसूचना जारी हो जाएगी। मगर बाद में पता चला कि इसका एरिया और बढ़ा दिया गया, जिसमें शाजापुर जिले की दो तहसीलों शुजालपुर और कालापीपल को भी शामिल किया गया है, जो इसके पहले भोपाल एरिया में जुड़ी थी। इंदौर जिला तो 100 प्रतिशत इस रीजन में शामिल है ही, वहीं अब शाजापुर भी हो गया और उसके साथ धार, देवास, उज्जैन, रतलाम की तहसीलें भी जुड़ गईं। 5वीं मर्तबा बढ़ाए गए क्षेत्रफल के चलते अब इंदौर विकास प्राधिकरण को कंसल्टेंट फर्म मेहता एंड एसोसिएट से अब नए सिरे से सर्वे- सीमांकन की प्रक्रिया करवानी पड़ेगी और अब इंदौर मेट्रो पॉलिटन रीजन देश का तीसरा सबसे बड़ा रीजन हो गया। अभी तक दिल्ली एनसीआर, जिसका क्षेत्रफल 55 हजार मीटर से ज्यादा है, के बाद दूसरा स्थान लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन है, जिसका क्षेत्रफल 27826 वर्ग किलोमीटर है और अब तीसरे स्थान पर 16 हजार वर्ग किलोमीटर के साथ इंदौर मेट्रोपॉलिटन आ गया है। यह भी महत्वपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ने एक साथ भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन की घोषणा की थी और उसके बाद जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी इस तरह के रीजन तैयार करने की घोषणा की गई। हालांकि भोपाल की तुलना में इंदौर रीजन का काम तेजी से हुआ। मगर बार-बार क्षेत्रफल बढ़ा देने के चलते अंतिम रूप से रीजन की सीमाएं और उसका सर्वे पूरा नहीं हो सका। अब पिछले दिनों चूंकि 1450 वर्ग किलोमीटर का एरिया और जोडऩे का निर्णय लिया गया, जिसके चलते अब इस बढ़े हुए एरिया का सर्वे-सीमांकन करते हुए इसे तैयार किए जाने वाले अभिन्यास में जोडऩा पड़ेगा। इसके साथ ही अब इस मेट्रोपॉलिटन रीजन को इंदौर-उज्जैन के साथ जोडक़र देखा जा रहा है। इसके कारण इंदौर का मास्टर प्लान जो 2045 तक का तैयार किया जाना है उसकी प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी है। नतीजतन रियल इस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान आए बिना विकास कार्य तेजी से नहीं हो सकेंगे, क्योंकि अभी नियोजन क्षेत्र में शामिल 79 गांवों में सभी तरह की अनुमतियां रुकी पड़ी है। पहले धारा 16 के तहत शासन मंजूरी दे रहा था। मगर बीते सवा साल से यह प्रक्रिया भी बंद हो गई, जिसके चलते कॉलोनाइजर, बिल्डर, डवलपर 79 गांवों में काम ही शुरू नहीं कर पा रहे हैं और धारा 16 में जो अनुमतियां भोपाल से हुई उन्हीं के अभिन्यास नगर तथा ग्राम निवेश से मंजूर हुए और उसके बाद प्रशासन से कॉलोनी सेल से विकास अनुमतियां प्राप्त की जा रही है। दूसरी तरफ मेट्रोपॉलिटन रीजन का क्षेत्रफल बार-बार बदलने के चलते इसकी भी अधिसूचना सहित आगे की प्रक्रिया भी फिलहाल नहीं हो पा रही है, जबकि कुछ समय पूर्व मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी ने इसके नियम भी बना लिए थे। चूंकि मुख्यमंत्री इस कमेटी के अध्यक्ष रहेंगे और इसे मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम 2025 नाम दिया गया और इस पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया भी की जाना है। मगर एरिया बढऩे के चलते इसमें भी अभी कुछ और समय लगेगा।

    आधा दर्जन जिलों की 37 तहसीलें हो गर्इं शामिल
    इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन में क्षेत्रफल बढऩे के साथ-साथ तहसीलों की संख्या में भी इजाफा हो गया है। अब आधा दर्जन यानी 6 जिलों की कुल 37 तहसीलें इस रीजन में शामिल हैं, जिसमें इंदौर तो शत-प्रतिशत है ही, वहीं उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर, रतलाम की भी तहसीलें जुड़ गई हैं। पहले रतलाम की दो तहसीलों और शाजापुर की पांच तहसीलों को शामिल किया था। उसके बाद उज्जैन जिले की माकड़ोन तहसील और देवास जिले की दो तहसीलों के साथ धार की एक तहसील का क्षेत्रफल भी बढ़ा दिया गया। बदनावर में चूंकि पीएम मित्र पार्क का बड़ा प्रोजेक्ट आ रहा है, जिसके चलते उसका 304 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा भी इंदौर रीजन में शामिल किया गया, तो दूसरी तरफ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के चलते रतलाम जिले को जोड़ा गया। अब कुल 16 हजार वर्ग किलोमीटर का एरिया इंदौर-उज्जैन मेट्रो रीजन में शामिल हो गया है।

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