
इंदौर। मकान मालिक (Landlord)-किराएदारों (Tenants) के सालों तक चलने वाले कानूनी विवादों (Legal Disputes) को हल करने के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट (Model Tenancy Act) लागू करने जा रही है, जिसे अभी विधि विभाग ने भी मंजूरी दे दी है और अब आला अफसरों की बैठक में इसका प्रजेंटेशन होगा और उसके बाद फिर कैबिनेट से मंजूरी ली जाएगी, ताकि विधानसभा के शीतलाकीन सत्र में इस एक्ट को मंजूर करवाकर लागू किया जा सके। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में यह एक्ट लागू होगा।
उक्त एक्ट में तीन स्तरों पर न्यायिक व्यवस्था का सिस्टम रहेगा, जिसमें किराया प्राधिकरण की अध्यक्षता अपर कलेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे, तो किराया न्यायालय की जिम्मेदारी एडीएम स्तर के अधिकारी को मिलेगी। वहीं किराया ट्रिब्यूनल में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी शामिल रहेंगे। इन संस्थाओं के निर्णय के बाद ही कोई भी विवादित मामला सिविल न्यायालय में ले जाया जा सकेगा। अभी जो मध्यप्रदेश में किराएदारी अधिनियम 2010 लागू है वह केवल शहरी क्षेत्र तक ही सीमित है। मगर नया एक्ट ग्रामीण क्षेत्र में भी लागू रहेगा। इसमें किराएदारों के वाजिब हितों की रक्षा तो की ही जाएगी, साथ ही मकान मालिकों को भी बड़ी राहत मिलेगी। आवासीय परिसर में अधिकतम 2 महीने और गैर आवासीय परिसरों में अधिकतम 6 महीने का एडवांस किराया लिया जा सकेगाऔर जो किराए पर घर, ऑफिस या अन्य सम्पत्ति दिलवाते हैं उन प्रॉपर्टी ब्रोकरों को भी इसमें कानूनी मान्यता दिलवाई जाएगी और उन्हें कलेक्टर कार्यालय में इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा और उनकी भी जिम्मेदारी रहेगी। विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद अब एक्ट की फाइल आगे बढ़ गई है।
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