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मोदी सरकार के चेहरे का मुखौटा उतर गया… भारत-पाकिस्तान मैच पर सामना में शिवसेना ने निकाली भड़ास

September 16, 2025

मुंबई: आखिरकार, बेशर्मी की पराकाष्ठा लांघकर दुबई (Dubai) में भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) मैच (Match) खेला गया. महाराष्ट्र (Maharashtra) समेत पूरे भारत में इस मैच का बहिष्कार किया जा रहा था. देशभक्तों ने मैच शुरू होते ही अपने टीवी बंद कर दिए, लेकिन बीजेपी (NJP) और उसके सहयोगियों ने अपने दरवाजे-खिड़कियां बंद करके पाकिस्तानियों के साथ इस खेल का दिल से लुत्फ उठाया.

सामना के संपादकीय लेख में लिखा गया है कि भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार (Central Government) ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने का फैसला लिया है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड और क्रिकेटरों को इसे स्वीकार करना होगा. गावस्कर ने जो कहा, उससे मोदी सरकार के चेहरे का मुखौटा उतर गया है. नाना पाटेकर ने पाकिस्तान के साथ खेलने का विरोध किया और अपनी तीखी राय व्यक्त की. उन्होंने कहा, ‘मेरे लोगों का खून बहा है. मैं उन लोगों के साथ क्यों खेलूं जिन्होंने खून बहाया?’ लंबे समय के बाद पाटेकर ने यह करारा प्रहार किया है. पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की जिद सरकार की थी, यानी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष जय शाह की थी.

सामना संपादकीय में लिखा कि यह समझना चाहिए कि जय शाह के पापा अमित शाह दुर्भाग्य से भारत के गृह मंत्री हैं. अमित शाह ने किस योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर अपने बेटे जय शाह को भारतीय क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया?. उन्होंने कहा कि क्रिकेट में जुए और सट्टेबाजी का पैसा है, इसलिए जय शाह को विशुद्ध व्यापार के लिए क्रिकेट व्यवसाय में लाया गया. इसका देशभक्ति से कोई लेना-देना नहीं है. इस मैच ने न केवल बीजेपी की देशभक्ति के ढोंग को उजागर किया है, बल्कि उसे नंगा भी कर दिया है.


  • संपादकीय में लिखा है कि दिलजीत दोसांझ की एक फिल्म को भारत में रिलीज नहीं होने दिया जा रहा है क्योंकि इसमें एक पाकिस्तानी अभिनेत्री ने काम किया है. लेकिन एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में पाकिस्तानी खिलाड़ी मैदान में भारत के खिलाफ खेले और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड ने एक दिन में लगभग 1 हजार करोड़ रुपए कमाए हैं, इसे क्या कहा जाए? क्या ये देशभक्ति है? बीजेपी की भूमिका दो मुंह वाले केंचुए की तरह है.

    लेख में लिखा गया कि पंद्रह दिन पहले एक अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल मैच के दौरान क्या हुआ था? मैच के दौरान, ब्राजील की पुलिस ने एक अर्जेंटीना समर्थक की पिटाई की. इस घटना से अर्जेंटीना की टीम इतनी नाराज हुई कि पूरी टीम यह कहते हुए मैदान छोड़कर चली गई कि यह हमारे देश का अपमान है और मैच खेलने से इनकार कर दिया. हमारी भारतीय क्रिकेट टीम ने क्या किया? उन्होंने उस पाकिस्तानी टीम के साथ क्रिकेट खेला, जिसने 26 निर्दोष भारतीयों को मार डाला. लोग कहते हैं कि भारतीय टीम ने यह मैच लिया..

    सामना में लिखा गया कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने क्रिकेट मैच में मिली इस फिक्सिंग जीत को सेना को समर्पित करने का ढोंग किया. यह भारतीय सेना और पुलवामा, पहलगाम के शहीदों का अपमान है. कह रहे हैं कि भारतीय कप्तान ने पाकिस्तानी कप्तान से हाथ भी नहीं मिलाया. बताया जा रहा है कि यह पहलगाम हमले का विरोध है. अगर पाकिस्तान और उस देश की क्रिकेट टीम के खिलाफ इतना गुस्सा और नफरत है, तो खुद को राष्ट्रवादी कहने वाली केंद्र की मोदी सरकार ने यह मैच क्यों खेलने दिया? यह ढोंग क्यों? एक भारतीय सैनिक देश के दुश्मन से लड़ता है और शहीद हो जाता है. वह युद्ध में नहीं जाने के लिए करोड़ों रुपए नहीं लेता. उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और परिजन अनाथ हो जाते हैं. उनके करुण क्रंदन से धरती भी कांप उठती है. लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम को यह बात कभी समझ नहीं आई. भारतीय क्रिकेट टीम सेना और युद्ध को खेल समझती है क्या?

    दुबई मैच से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को कम से कम हजार करोड़ रुपए मिले. भारत-पाक मैच पर लाखों-करोड़ों का सट्टा खेला गया. बताया जा रहा है कि इसमें से कम से कम 50 हजार करोड़ रुपए पाकिस्तान के जुए के सौदागरों तक पहुंचे. फिर पाकिस्तान से ऐसे मैचों पर सट्टा लगाने वाले लोग भारत से भाग गए हैं, वे मुंबई में आतंकवादी घटनाओं में शामिल हैं. इस तरह के आरोप इससे पहले बीजेपी के ही राष्ट्रभक्त नेता ने लगाया है. फिर कल के मैच पर हुए जुआ का पैसा भी वहीं गया. एक तरह से भारत में आतंकवाद फैलाने वालों के हाथ को मजबूत करने का राष्ट्रीय कार्य बीजेपी सरकार ने पूरा किया. रविवार को एशिया कप में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के माध्यम से मोदीकृत बीजेपी सरकार ने आतंकवादियों का खुलकर समर्थन किया और आर्थिक मदद पहुंचाई.

    सामना लेख में लिखा गया कि प्रत्येक भारतीय नागरिक को इस कृत्य की निंदा करनी चाहिए. महाराष्ट्र के शिंदे गुट ने भारतीय कप्तान सूर्यकुमार का खासतौर पर अभिनंदन किया. यह उन भारतीय महिलाओं का अपमान है जिनकी मांग से सिंदूर पोंछ दिया गया है. इसे शुद्ध हिंदी में चाटुकारिता कहते हैं. इस बहाने उनके हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का ढोंग निर्वस्त्र हो गया. अंत में लेख में लिखा गया कि अरे, थू है तुम्हारे ढोंग पर, पाखंड पर!

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