
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 दिसंबर को शुरू हुई थी. दो दिवसीय चली इस बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी आरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra) 5 दिसंबर को बताया कि रेपो रेट (repo rate) में .25 फीसदी की कटौती की गई है. दिनभर की हर बड़ी अपडेट, एक्सपर्ट रिएक्शन और आपके लोन पर इसका असर इस लाइव ब्लॉग में आपको मिलता रहेगा.
इस साल 3 बार घटा रेपो रेट
खुदरा महंगाई में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो दर में तीन किस्तों में कुल 1 फीसदी की कटौती की है. हालांकि पिछली दो बार से रेपो दर को 5.5 फीसदी पर स्थिर रखा गया है. आरबीआई गवर्नर ने भी पिछले महीने कहा था कि नीतिगत ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है.
RBI MPC Meet Live : रेपो रेट में 0.25% की कटौती
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज (5 दिसंबर) मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक के बाद लिए गए फैसलों की घोषणा की. उन्होंने बताया कि रेपो रेट में 0.25% की कटौती करने का फैसला लिया गया है.
RBI policy से पहले शेयर बाजार सपाट
शेयर बाज़ार आज शुरुआत में लगभग सपाट दिखा, क्योंकि निवेशक RBI की नीति आने का इंतज़ार कर रहे हैं. सेंसेक्स और निफ़्टी दोनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा. कुछ चुनिंदा शेयरों में तेजी रही, जिनमें Eternal, HCL Tech और Bajaj Finance सबसे ऊपर रहे. सेक्टरों की बात करें तो निफ़्टी आईटी इंडेक्स सबसे आगे रहा और करीब 0.4% चढ़ा. इसके बाद निफ़्टी रियल्टी और निफ़्टी ऑटो में लगभग 0.3% की बढ़त देखने को मिली. दूसरी तरफ, निफ़्टी मीडिया इंडेक्स सबसे कमजोर रहा और 0.5% गिर गया. निफ़्टी ऑयल & गैस और निफ़्टी हेल्थकेयर भी लगभग 0.4% नीचे आए.
आरबीआई के रेपो रेट कट से मिलेगा ये फायदा
अमरावती ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन रवि प्रकाश पांडे के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से रेपो रेट में कमी की उम्मीद है, क्योंकि थोड़ी सी भी डिडक्शन से घरों की डिमांड काफी बढ़ सकती है और लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है. उधार लेने की कम लागत घर खरीदने वालों को आगे आने के लिए बढ़ावा देती है और डेवलपर्स को प्लान किए गए इन्वेस्टमेंट में तेज़ी लाने में मदद करती है. इस समय एक सोची-समझी रेट डिडक्शन से सेक्टर की ग्रोथ को समय पर सपोर्ट मिलेगा.”
आरबीआई का रेपो रेट स्थिर रहने पर रियल एस्टेट सेक्टर पर प्रभाव
आशीष भूटानी, सीईओ भूटानी ग्रुप ने बताया है कि हमें उम्मीद है कि आरबीआई का रेपो रेट स्थिर रहेगा, जो रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक मज़बूत, पॉज़िटिव सिग्नल देगा. रेट में एक जैसा रहने से मार्केट का अंदाज़ा लगाना बेहतर होता है, उधार लेने की स्थिति अच्छी रहती है, और डेवलपर्स और घर खरीदने वालों दोनों को साफ और भरोसे के साथ प्लान बनाने में मदद मिलती है. ऐसी स्थिर मॉनेटरी पॉलिसी सेंटीमेंट को मज़बूत करने और लंबे समय तक चलने वाली ग्रोथ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है.”
RBI का महंगाई का अनुमान
आरबीआई ने बड़ी राहत वाली खबर दी है. बैंक ने कहा है कि अगले वित्तीय साल 2025-26 में पूरे साल महंगाई सिर्फ 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो फरवरी में बताए 4.2 प्रतिशत से काफी कम है. इसके अलावा वित्तीय साल 2026 के आखिरी तीन महीनों में महंगाई 4 प्रतिशत और उसके अगले साल 2027 की पहली तिमाही में 4.5 प्रतिशत रह सकती है. मतलब आने वाला साल महंगाई के मामले में बहुत आरामदायक रहने वाला है, कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेंगी और जेब पर बोझ कम पड़ेगा.
FY26 की दूसरी तिमाही में 8.2% रही GDP ग्रोथ रेट
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की इकोनॉमी 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी. यह पिछले डेढ़ साल में सबसे ज्यादा है. एनएसओ की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, कृषि क्षेत्र की सुस्ती पर मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी और सर्विस सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन भारी पड़ा. बीते वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.6 फीसदी रही थी.
रेपो रेट जस की तस रहने का अनुमान: अदिति गुप्ता
बैंक ऑफ बड़ौदा की इकोनॉमिस्ट अदिति गुप्ता का कहना है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी रेपो रेट को संभवतः 5.5 फीसदी पर यथावत रखेगी. रुख न्यूट्रल रहेगा. अगस्त और अक्टूबर की मीटिंग में भी रेपो रेट को 5.5 फीसदी पर स्थिर रखा गया था. आखिरी बार कटौती जून 2025 में हुई थी.
अक्टूबर में 0.25 फीसदी पर रही थी रिटेल इन्फ्लेशन
अक्टूबर महीने में रिटेल इन्फ्लेशन एक दशक के अपने सबसे निचले लेवल 0.25 फीसदी पर रही. नवंबर महीने के डेटा अभी रिलीज नहीं हुए हैं, होलसेल इन्फ्लेशन रेट -1.21 फीसदी पर आ गई. रिटेल इन्फ्लेशन सरकार की ओर से तय 2 फीसदी के निचले लेवल से नीचे बनी हुई है. रिजर्व बैंक रेपो रेट पर फैसला लेने के लिए रिटेल इन्फ्लेशन के डेटा को ध्यान में रखता है.
रेपो रेट को कम करना जरूरी: लक्ष्मी वेंकटरमण वेंकटेशन
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट (बीवाईएसटी) की फाउंडर और प्रबंधन ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमण वेंकटेशन का कहना है कि मौजूदा रेपो रेट 5.5% पर आ गया है, जो पिछले एक साल में 6.5% से काफी नीचे आया है. अक्टूबर में महंगाई पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर 0.25% पर है और थोक मूल्यों में तो 1.21% की गिरावट आई है. लगभग 70% माइक्रो और छोटे उद्यमों के लोन सीधे रेपो रेट से जुड़े हुए हैं, इसलिए रेपो रेट कम होने से इनकी ब्याज लागत तुरंत कम हो जाती है, बशर्ते बैंक अंतिम दर तय करते समय अपना मार्जिन न बढ़ाएं. फिर भी चुनौतियां बाकी हैं. माइक्रो उद्यम अभी भी संघर्ष कर रहे हैं, खासकर महिला उद्यमी क्योंकि 85% महिला उद्यमियों को बैंक लोन लेने में बाधाएं आती हैं. क्रेडिट गैप अभी भी बहुत बड़ा है और नीतिगत माहौल बेहतर होने के बावजूद जमीनी स्तर पर वित्त तक पहुंच अभी भी मुश्किल बनी हुई है. ऐसे में रेपो रेट को और 25-50 आधार अंक (0.25-0.50%) कम करके 5.25% करना पूरी तरह तर्कसंगत और बहुत जरूरी है. लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह कटौती का फायदा बैंकों ने माइक्रो उद्यमों तक वाकई पहुंचाया या नहीं. बैंकों को सस्ता और आसानी से उपलब्ध क्रेडिट सुनिश्चित करना होगा, ताकि उद्यमी अपने कारोबार को चलाते रहें और उसे बढ़ा सकें.
फरवरी 2025 से अब तक 1 फीसदी घटी रेपो दर
खुदरा महंगाई में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में 3 किस्तों में कुल एक फीसदी की कटौती की है. हालांकि पिछली दो बार से रेपो रेट को 5.5 फीसदी पर स्थिर रखा गया है.
क्या होता है Repo Rate, जिसे लेकर RBI आज करेगा फैसला, आपके EMI पर पड़ता है सीधा असर
आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) का फैसला सुनाने वाला है. हर बार की तरह इस बार भी सबसे बड़ी चर्चा का विषय रेपो रेट (Repo Rate) है. करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए यह सिर्फ एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि ईएमआई (EMI) के बढ़ने-घटने की कुंजी है. होम लोन महंगा होगा या सस्ता, ऑटो लोन में बचत होगी या बोझ बढ़ेगा, इसका सीधा हिसाब इसी एक रेट से निकलता है. लेकिन असल में यह रेपो रेट होता क्या है? क्यों RBI इसे रोज बदलता नहीं और ये आपकी जेब को इतनी जोर से क्यों झकझोर देता है?

©2026 Agnibaan , All Rights Reserved