
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली के एक सरकारी स्कूल सिठौरा प्राथमिक विद्यालय में मोहम्मद अहमद नाम के शिक्षक ने ऐसा काम किया है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है. वह इस स्कूल में हेडमास्टर के पद पर कार्यरत थे, लेकिन 31 मार्च 2024 को रिटायर हो गए. इसके बावजूद भी वह रोजाना स्कूल जा रहे हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं.
दरअसल साल 2015 में जब अहमद साहब का ट्रांसफर सिठौरा प्राथमिक विद्यालय में हुआ. तब स्कूल में सिर्फ वही एक शिक्षक थे. स्कूल में बच्चों की संख्या बहुत कम थी और आसपास के लोग अपने बच्चों को पढ़ने नहीं भेजते थे. स्कूल की हालत भी इतनी खराब थी कि स्कूल में न पढ़ाई का माहौल था और न ही कोई सुविधा थी. ऐसे में जब अहमद साहब का इस स्कूल में ट्रांसफर हुआ तो उन्होंने स्कूल और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की ठान ली.
अहमद साहब घर-घर जाकर लोगों को समझाने लगे कि बच्चों को स्कूल भेजना कितना जरूरी है. उनकी मेहनत रंग लाई और कुछ ही सालों में बच्चों की संख्या 100 के पार पहुंच गई. स्कूल का नाम भी बरेली शहर के अच्छे स्कूलों में आने लगा. 31 मार्च 2024 को जब अहमद साहब रिटायर हुए, तो स्कूल में उनकी जगह कोई भी दूसरा शिक्षक नहीं था. सरकारी नियमों के चलते नगर क्षेत्र के इस स्कूल में नई नियुक्ति नहीं हो सकी.
जब शिक्षा विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिली तो अहमद साहब को बच्चों की पढ़ाई की चिंता सताने लगी. उन्होंने खुद तय किया कि वह बिना किसी वेतन या पद के रोज स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे. तब से अभी तक वह हर दिन समय पर स्कूल जाते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं. अहमद साहब की इस लगन और सेवा भावना को देखकर गांव के लोग भी उनका बहुत सम्मान करते हैं. गांव वालों का कहना है कि अगर अहमद मास्साब न होते, तो स्कूल कब का बंद हो चुका होता और बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाता.
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