नई दिल्ली। दुनियाभर में ईसाइयों की वैश्विक आबादी (Global Population of Christians) कम होती जा रही है। यह खुलासा हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में हुआ है। हाल में जारी प्यू टेम्पलटन ग्लोबल रिलिजियस फ्यूचर्स प्रोजेक्ट (Pew‑Templeton Global Religious Futures Project) की रिपोर्ट के अनुसार, ईसाई धर्म अब भी दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है, लेकिन कुल आबादी में उसकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है। खास बात यह है कि इस धर्म का पारंपरिक केंद्र यूरोप और अमेरिका से खिसककर अब उप-सहारा अफ्रीका की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
201 देशों के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन
यह रिपोर्ट 201 देशों और क्षेत्रों में 2,700 से अधिक जनगणनाओं और सर्वेक्षणों के विश्लेषण पर तैयार की गई है।
वर्ष 2020 तक दुनिया में लगभग 2.3 अरब लोग (28.8%) खुद को ईसाई मानते थे।
2010 में यह संख्या 2.1 अरब थी, यानी दशक भर में करीब 6% वृद्धि हुई।
लेकिन इसी अवधि में वैश्विक आबादी और गैर-ईसाई समुदायों की संख्या 15% बढ़ने से ईसाइयों की हिस्सेदारी 31% से घटकर 28.8% रह गई।
यानी संख्या बढ़ने के बावजूद, दुनिया की कुल आबादी में उनका अनुपात कम हो गया।
गिरावट के पीछे दो बड़े कारण
रिपोर्ट में इस बदलाव के पीछे प्रमुख वजहें बताई गई हैं:
कई देशों में जन्म दर का घटते जाना
वयस्क होने पर धर्म छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति
अध्ययन के मुताबिक हाल के वर्षों में हर एक नए ईसाई के मुकाबले लगभग 3.1 लोग धर्म से अलग हुए। इनमें से अधिकांश ने कोई दूसरा धर्म नहीं अपनाया, बल्कि खुद को किसी भी धार्मिक पहचान से दूर बताया।
भौगोलिक केंद्र में बड़ा बदलाव
ईसाई आबादी का वितरण भी तेजी से बदल रहा है।
यूरोप में ईसाइयों की संख्या घटकर लगभग 50 करोड़ रह गई, जो करीब 9% की कमी है। उत्तर अमेरिका में यह संख्या घटकर करीब 23 करोड़ रह गई।
इसके विपरीत, उप-सहारा अफ्रीका में ईसाइयों की आबादी 31% बढ़कर 69 करोड़ तक पहुंच गई।
वर्ष 2020 तक वैश्विक ईसाई आबादी का वितरण इस प्रकार था
31% – उप-सहारा अफ्रीका
22% – यूरोप
24% – लैटिन अमेरिका व कैरिबियन
10% – उत्तर अमेरिका
रिपोर्ट में 41 देशों में कम से कम 5 प्रतिशत अंक का बड़ा धार्मिक बदलाव दर्ज किया गया, जिनमें अधिकांश जगह ईसाई हिस्सेदारी घटी।
दुनिया के धर्मों का वर्तमान प्रतिशत
2020 के वैश्विक धार्मिक परिदृश्य के अनुसार:
28.8% – ईसाई
25.6% – मुस्लिम
14.9% – हिंदू
4.1% – बौद्ध
24.2% – ऐसे लोग जो खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ते
इस तरह दुनिया की 75.8% आबादी किसी न किसी धर्म से जुड़ी हुई है, जबकि लगभग एक चौथाई आबादी (24.2%) स्वयं को धार्मिक पहचान से अलग मानती है।
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल संख्या का नहीं, बल्कि धार्मिक पहचान, जनसंख्या वृद्धि दर और सामाजिक बदलावों का संकेत है। आने वाले दशकों में धार्मिक मानचित्र और अधिक क्षेत्रीय रूप से विविध होने की संभावना जताई जा रही है।
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