
इंदौर। कल भाजपा ने 62 जिलों के प्रभारंी के रूप में नेताओं की नियुक्तियों की सूची जारी कर दी। इसमें विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसदों के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जवाबदारी सौंपी हैं। इंदौर शहर में भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री और राज्यपाल रहे कप्तानसिंह सोलंकी के पुत्र राजेश सोलंकी को जवाबदारी सौंपी गई है। सोलंकी पहले बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रहे हैं। हालांकि पिता के संगठन महामंत्री होने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिला और उन्होंने आज तक एक भी चुनाव नहीं लड़ा।
भाजपा में राजनीतिक शुचिता और अनुशासन के लिए जाने जाने वाले कप्तानसिंह सोलंकी प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री रहे। संघ से निकले कप्तानसिंह को फिर त्रिपुरा और बाद में हरियाणा का राज्यपाल बनाया गया था। उनके स्थान पर प्रदेश में माखनसिंह की नियुक्ति की गई थी। हालांकि कप्तानसिंह अब 86 बरस के हो चुके हैं, लेकिन उनकी दूसरी पीढ़ी भाजपा की राजनीति में सक्रिय हो रही है। इंदौर शहर के प्रभारी के रूप में उनके बड़े पुत्र राजेश सोलंकी को जवाबदारी दी गई है। ग्वालियर के रहने वाले सोलंकी के सामने इंदौर की राजनीति में समन्वय बिठाना एक बड़ी चुनौती साबित होगा।
हालांकि इंदौर में अभी किसी प्रकार गुटीय असंतुलन नहीं है, लेकिन पुराने कार्यकर्ताओं को कहना है कि उन्हें तवज्जो न देकर पार्टी अपनी ही परंपरा को तोड़ रही है और नए-नए लोगों को उपकृतकर रही है, जिन्होंने कभी पार्टी के आयोजनों में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्र में रतलाम के विधायक रहे शैलेन्द्र डागा को जवाबदारी सौंपी है। ग्रामीण क्षेत्र में विधायक मधु वर्मा, मनोज पटेल, उषा ठाकुर और तुलसी सिलावट जैसे नेताओं को अपना अलग वर्चस्व है। उन्हें संगठन के साथ एक जाजम पर बिठाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
नेमा को तीन बड़े नेताओं के बीच बिठाना होगा सामंजस्य
विधायक रहे गोपीकृष्ण नेमा को पार्टी ने ग्वालियर शहर का प्रभारी बनाकर भेजा है तो सुदर्शन गुप्ता को बैतूल का प्रभारी बनाया है। नेमा सर्वश्रेष्ठ विधायक का तमगा भी पा चुके हंै और संगठन तथा कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बिठाने के मामले में जाने जाते हैं। धार, खंडवा, बुरहानपुर में वे इस पद पर रह चुके हैं और वर्तमान में मंदसौर जिले के प्रभारी थे। अब उनके सामने भी ग्वालियर एक चुनौती है, $क्योंाकि यहां भाजपा के तीन बड़े क्षत्रपों का राज है। एक तो विधानसभा नरेन्द्रसिंह तोमर, दूसरे केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तीसरे जयभानसिंह पवैया। इनके समर्थकों में आपसी तालमेल बिठाकर संगठन की मजबूती बनाए रखना नेमा के लिए चुनौती हैं। वरिष्ठ होने के नाते नेमा को इसलिए भी चुना गया है कि उनकी बात हर कार्यकर्ता माने। साथ ही यहां सिंधिया गुट से प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट है तो संगठन ने नेमा को अपनी ओर से भेजा है।
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