
इंदौर। जबलपुर हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने नगर निगम में पदस्थ नगर नियोजक नीरज लिखार को पद से हटाने के आदेश जारी किए थे, जिसके चलते कल आयुक्त ने उन्हें हटाकर अधीक्षण यंत्री असीत खरे को यह जिम्मेदारी सौंप दी। हालांकि इस मामले में नीरज के भाई अजय लिखार के फर्जी जाति प्रमाण-पत्र मामले में जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बैंच 4 साल पहले स्टे दे चुकी है। उल्लेखनीय है कि फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के मामले में नीरज लिखार पर भी आरोप लगाया और उनके खिलाफ याचिका दायर की गई कि उनके बड़े भाई अजय लिखार का जाति प्रमाण-पत्र फर्जी साबित हुआ था, उन्हें बर्खास्त भी कर दिया था। इस आधार पर नीरज लिखार भी नौकरी के पात्र नहीं हैं, जिसके चलते अभी हाईकोर्ट ने नीरज लिखार को भी हटाने के आदेश दे दिए।
जबकि इस बारे में नीरज लिखार का कहना है कि उन्हें नोटिस तक नहीं मिला और एकतरफा यह आदेश आया, जिसे उनके द्वारा हाईकोर्ट में भी चुनौती दी जा रही है, क्योंकि उनको हटाने के आदेश में जो आधार उनके भाई का लिया गया है उसकी हकीकत यह है कि हाईकोर्ट की डबल बैंच 15.06.2021 को ही इस संबंध में स्टे आदेश जारी कर चुकी है और मामला फिलहाल हाई पॉवर कमेटी के पास विचाराधीन है और हाईकोर्ट स्टे के चलते उनके बड़े भाई अजय लिखार ना सिर्फ अभी भी सरकारी नौकरी कर रहे हैं, बल्कि कुछ समय पूर्व उनका प्रमोशन भी हुआ। हालांकि इस मामले में अब 30 जून को अगली सुनवाई होना है।
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