
नई दिल्ली. अमेरिका (US) ने खुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO से अलग कर लिया है. अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने बयान जारी कर इस बात का ऐलान कर दिया है कि अमेरिका अब आधिकारिक तौर पर डब्ल्यूएचओ का सदस्य नहीं है. जिनेवा (Geneva) स्थित डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के बाहर से अमेरिका का झंडा (flag) भी अब हटा दिया गया है. अमेरिका ने कहा है कि हम डब्ल्यूएचओ के साथ सीमित स्तर पर काम करेंगे, ताकि इस संगठन से अलग होने की प्रक्रिया को पूरा किया जा सके.
अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल होने की भी हमारी कोई योजना नहीं है, और ना ही दोबारा इसमें शामिल होने की. अमेरिका ने साफ कहा है कि हम बीमारियों की निगरानी और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बजाय अन्य देशों के साथ मिलकर काम करेंगे. अमेरिका ने यह भी कहा है कि उसका यह फैसला कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की विफलताओं को दर्शाता है.
अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब एक साल से लगातार यह चेतावनी दी जा रही थी कि इससे अमेरिका और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को नुकसान पहुंच सकता है. अमेरिका ने संगठन से बाहर निकलने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सीमित स्तर पर डब्ल्यूएचओ के साथ काम करने की बात कही है. दरअसल, अमेरिकी कानून के तहत संगठन छोड़ने के लिए एक साल पहले सूचना देने और सभी बकाया शुल्क का भुगतान जरूरी है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक उसका अमेरिका पर 26 करोड़ डॉलर बकाया है.
WHO के प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिका ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए बकाया शुल्क अभी तक नहीं चुकाया है. हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी जनता पहले ही काफी भुगतान कर चुकी है. अमेरिकी अधिकारी ने इस बात से भी इनकार किया कि कानून में ऐसी कोई शर्त है कि संगठन से बाहर निकलने के पहले भुगततान अनिवार्य है. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के ओ’नील इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ लॉ के संस्थापक निदेशक लॉरेंस गोस्टिन ने कहा कि यह अमेरिकी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है, लेकिन पूरी संभावना है कि ट्रंप इससे बच निकलेंगे.
अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) ने यह घोषणा कर दी है कि सरकार ने WHO को दी जाने वाली फंडिंग अब समाप्त कर दी है. HHS के प्रवक्ता के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए WHO को भविष्य में किसी भी अमेरिकी सरकारी संसाधन के हस्तांतरण पर रोक लगा दी है. इस संगठन के कारण अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. WHO के प्रवक्ता ने अमेरिका के इस फैसले पर कहा है कि फरवरी में होने वाली कार्यकारी बोर्ड की बैठक में सदस्य देश अमेरिका के बाहर निकलने और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
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