
विभाग के अधिकारियो ने पूर्व कलेक्टर को भी रखा अंधेरे में कहा 2 महीने पहले ही कि चाकचौबंद व्यवस्था
इंदौर। जिले में खनन कार्य (Mining Operations) बंद होने के बाद लावारिस पड़ी लगभग 80 से अधिक खदानें (Mines) अब हादसों का कारण बन रही हैं। जल भराव वाली इन खदानों में डूबने से दो महीने में 5 बच्चों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके आज तक जिम्मेदार विभागों ने सुरक्षा व्यवस्था (security system) सुनिश्चित नहीं की। हाल ही में गणपति विसर्जन के दौरान एसडीएम द्वारा किए गए निरीक्षण से इसका खुलासा भी हुआ था और अधिकारियों ने दिनभर तहसीलदारों को तैनात कर उनकी निगरानी में गणपति विसर्जन करवाया था।
बारिश का मौसम शुरू होते ही खनिज विभाग के माध्यम से न केवल बंद पड़ी खदानों में सुरक्षा व्यवस्था की जाती है, बल्कि बैरिकेड लगाकर होमगार्ड की तैनाती भी अनिवार्य की गई है, लेकिन इसी विभाग के अधिकारी आदेश निकालकर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने भी मीडिया के संज्ञान में लाए जाने पर विभाग के उच्च अधिकारियों से जवाब मांगा था, तब उन्हें अंधेरे में रखकर जानकारी दी गई थी कि आदेश निकालकर चाकचौबंद व्यवस्था कर ली गई है, जबकि जमीनी हकीकत बिलकुल अलग है। वर्तमान स्थिति का खुलासा गणपति विसर्जन के वीडियो और फोटो में साफ देखा जा सकता है। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि खदानों के किनारों पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, न सुरक्षा बैरिकेडिंग की गई है और न ही निगरानी के लिए कोई गार्ड नियुक्त है।
जानकारी देने से बचते हैं जिम्मेदार
जानकार बताते हैं कि इंदौर जिले में दर्जनों छोटी-बड़ी खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं और उनमें वर्षा के पानी से गहरे तालाब बन गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अकसर यहां नहाने व तैरने पहुंच जाते हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इन खदानों को या तो पाटने की कार्रवाई करे या फिर इनके चारों ओर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी सुनिश्चित करे, ताकि और मासूम जानें हादसों की भेंट न चढ़ें। हालांकि जिम्मेदार बंद पड़ी खदानों की जानकारी देने से बचते रहते हैं, वहीं इन खदानों को मत्स्य विभाग या अन्य विभागों को हैंडओवर किए जाने का भी हवाला देते हैं।
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