
नई दिल्ली. AI को लेकर जोरो-शोरों से तैयारी चल रही है और इसको लेकर भारी-भरकम इनवेस्टमेंट (Investment) भी हो रहा है. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 में AI को लेकर जितना इनवेस्टमेंट होना है वो रकम भारत (India) में इस साल पूरे देश के खर्चे के बराबर है. यह रकम 650 बिलियन अमेरिकी डॉलर है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में बताया है कि चार बड़ी टेक कंपनियां AI को लेकर 650 बिलियन डॉलर खर्च करने वाली हैं. यह खर्च भारत में आम बजट के बराबर है, जिसमें पूरे देश के विकास और अन्य खर्चों के लिए कुल खर्च करीब 670 बिलियन डॉलर तय किया है.
ये टेक कंपनियां करेंगी इनवेस्टमेंट
भारत जितना अमाउंट देश के विकास और जरूरतों के लिए खर्च करेगा, उतना ही अमाउंट Google, Meta, Amazon और माइक्रोसॉफ्ट AI के लिए इनवेस्ट करने जा रही हैं.
हाल ही में इनवेस्टमेंट की डिटेल्स शेयर की थी
हाल ही में बड़ी टेक कंपनियों ने अपनी फाइनेंशियल डिटेल्स और इनवेस्टमेंट के बारे में बताया था. गूगल ने कुछ दिन पहले बताया था कि 185 बिलियन अमेरिकी डॉलर की इनवेस्टमेंट करने जा रहे हैं. Amazon ने बताया कि वह साल 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनवेस्टमेंट करैगा.
वहीं Meta Inc ने AI को लेकर अपना खर्चा 135 बिलियन अमेरिकी डॉलर बताया है. माइक्रोसॉफ्ट का आंकड़ा 120 बिलियन डॉलर का है.
इनवेस्टमेंट का ज्यादातर हिस्सा सीधे AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाएगा. मोटी इनवेस्टेमेंट की मदद से डेटा सेंटर और उनमें यूज होने वाले सर्वर पर किया जाएगा.
चारों कंपनियों के AI प्रोडक्ट
Google, Meta, Amazon और माइक्रोसॉफ्ट AI को लेकर बड़ी तैयारी कर रही हैं. चारों कंपनियों के AI के चैटबॉट / एजेंट्स के नाम ये हैं.
गूगल का जेमिनआई है, जो सर्च, Gmail, Docs और Android में इंटीग्रेटेड AI असिस्टेंट है.
Amazon का Amazon Q और Alexa है. ऐमेजॉन क्यू जहां बिजनेस और एंटरप्राइज में यूज किया जाता है. वहीं एलेक्सा वॉयस असिस्टेंट है.
Meta का Meta AI मौजूद है. यह वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक के साथ मिलने वाला AI चैटबॉट है.
माइक्रोसॉफ्ट को Copilot है. इसको विंडोज, ऑफिस, एज ब्राउजर में इस्तेमाल किया जाता है.
AI डेटा सेंटर्स क्या होते हैं?
AI डेटा सेंटर्स, असल में एक इमारत होती है. इस इमारत के अंदर कुछ उपकरण, इक्विपमेंट और कंप्यूटर सर्रर होते हैं. इनके अंदर यूजर्स का डेटा और अन्य जानकारी को स्टोर करके रखा जाता है. ये डेटा सेंटर्स दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं. इनमें खास तरह का डिजाइन होता है और तैयार करने में मोटा खर्चा आता है.
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