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SC-स्पीकर और EC पर करते हैं संदेह… लोकसभा में विपक्ष पर बरसे अमित शाह

March 11, 2026

नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया है. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि स्पीकर के खिलाफ आया अविश्वास प्रस्ताव सामान्य घटना नहीं है. करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया. ये अफसोसजनक घटना है. स्पीकर किसी दल के नहीं बल्कि सदन के होते हैं. सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं.

उन्होंने कहा कि अनुशासन नहीं तो माइक बंद होगा. जब कोई नियमों को नजरअंदाज करेगा तो स्पीकर के पास ये अधिकार है कि उसे रोके-टोके और निकालकर बाहर करे. शाह ने कहा कि ये लोग चर्चा करना ही नहीं चाहते. जब बोलने का मौका आता है तो राहुल गांधी जर्मनी, लंदन में होते हैं. संसद में किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हो सकती है. उन्होंने कहा कि विपक्ष हर संस्था पर सवाल खड़ा करता है. ये सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और स्पीकर पर तक शंका करता है.

अमित शाह ने कहा, सदन में दस घंटे से ज्यादा चर्चा हुई है. 42 से ज्यादा सांसदों ने अपनी बात रखी है. पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि स्पीकर की जब नियुक्ति हुई तब दोनों दलों के नेताओं (नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष) ने एक साथ उनको आसन पर बैठाने का काम किया, इसका मतलब है कि पक्ष और विपक्ष दोनों ने समर्थन किया.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, स्पीकर के फैसले पर असहमति तो व्यक्त हो सकती है. इससे विपरीत विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया.लोकसभा देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है. दुनिया में हमारी साख है. जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है. ये लोग चेंबर में जाते हैं तो उन्हें अपनी सुरक्षा की फिक्र होती है. स्पीकर का पद पार्टी से ऊपर होता है.

अमित शाह ने कहा, 75 साल से दोनों सदनों ने लोकतंत्र की नींव को गहरा बनाया है लेकिन विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सदन आपसी विश्वास से चलता है. पक्ष और विपक्ष के लिए स्पीकर अभिभावक होते हैं. लोकसभा कैसे चलनी है इसके लिए नियम बनाए गए हैं. सदन कोई मेला नहीं, यहां नियम के हिसाब से बोलना होता है.

उन्होंने कहा, जब आप सदन के नियमों को नजरअंदाज करोगे तो स्पीकर का दायित्व है कि उसे रोके-टोके और निकालकर बाहर करे. ये अधिकार, ये नियम हमारे समय में नहीं बने, ये नियम नेहरू के समय के हैं. यहां अपनी मर्जी से नहीं बोला जा सकता है. स्पीकर जब फैसला देते हैं तो हो सकता है सत्ता पक्ष और विपक्ष को मंजूर ना हो लेकिन निर्णय पर शंका नहीं कर सकते.


  • शाह ने कहा, अपनी राजनीतिक यात्रा में हम तो लंबे समय तक विपक्ष में बैठे. अब तक 3 बार अविश्वास प्रस्ताव आए. इसमें एक बार भी बीजेपी ये नहीं लाई. हम कभी भी स्पीकर के सामने अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए हैं. स्पीकर की निष्ठा पर शंका नहीं करनी चाहिए. हम सब स्पीकर के महत्व का जानते हैं. व्यवस्था और शिष्टाचार को बनाए रखना, स्पीकर का काम है. ये पहला कर्तव्य है. कोई भी व्यक्ति खड़ा होकर कुछ भी बोलेगा, ऐसा नहीं चलेगा. नियम से बोलना होता है. नियम का उल्लंघन करने पर स्पीकर को अधिकार है कि उनको बैठा दे.

    कोई भी सदस्य भाषण देते समय स्पीकर के माध्यम से बोलता है. नियमों की अवहेलना करने पर स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने और निलंबित करने का अधिकार है. गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में सदन को स्थगित करने का अधिकार है. प्रधानमंत्री की चेयर तक महिला सांसद एकजुट होकर आ जाएं, ये सही नहीं है. किसी सदस्य ने कहा कि हमारा बोला हुआ काट दिया जाता है… स्पीकर को अधिकार है कि असंसदीय शब्दों को हटाने का अधिकार है.

    अमित शाह ने कहा कि हमें अधिकार मिले हैं लेकिन कोई विशेषाधिकार नहीं है. अविश्वास प्रस्ताव रोज मर्रा की चीज नहीं है. पहले तीन बार जब अविश्वास प्रस्ताव आए तब चर्चा के दौरान स्पीकर आसन ग्रहण नहीं करेंगे. एकमात्र स्पीकर ओम बिरला हैं जिन्होंने आसन नहीं ग्रहण किया. बिरला साहब को मोरल ग्राउंड मत सिखाइए.

    अमित शाह ने कहा, विपक्ष में इतनी गंभीरता नहीं है कि नियमों के हिसाब से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है. फिर भी इनको मौका दिया. ये मोरल ग्राउंड की बात करते हैं. सदन में गंभीरता की बात करते हैं. बिरला जी ने इनको गलती सुधारने का मौका दिया. जो ये प्रस्ताव लाए वो नियम अनुसार ही नहीं है.

    उन्होंने कहा, कुछ सदस्यों ने कहा कि माइक बंद हो रहा है कि इस वजह से अविश्वास प्रस्ताव आया है. अभी गिरिराज सिंह का माइक बंद हुआ. जो नियम से नहीं चलेगा उसका माइक बंद होता है और बंद होना ही चाहिए. राहुल गांधी ही नहीं दूसरों का भी माइक बंद होता है. ये अपने प्रस्ताव पर गंभीर ही नहीं है. प्रस्ताव पर चर्चा करने के बजाय सदन को बिखेरने का काम किया. चर्चा करते नहीं और कहते हैं कि बोलने नहीं देते.

    अमित शाह ने कहा, ये हमें परंपराएं सिखाते हैं. ये कहते हैं कि बोलने का मौका नहीं मिलता है. नए सदस्यों को बोलने का अधिकार मिलना चाहिए. जो लोग ये कहते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जा रहा है ये कहने से बीजेपी की छवि को नुकसान पहुंचाने की मंसूबे कामयाब नहीं होंगे. हमने कभी विपक्ष की आवाज दबाने का काम नहीं किया. विपक्ष की आवाज दबाने का काम तो इमरजेंसी में हुआ था. सदन में सदस्य का आचरण कैसा हो… ये तय करने का अधिकार पीठ के पास है. इसका फैसला करने का अधिकार आसन के पास है.

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