
नई दिल्ली: सरकार अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited) के कामकाज में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है. इसका मकसद कंपनी की कामकाजी क्षमता बढ़ाकर हवाई सेना (Wings Army) और अन्य सशस्त्र बलों (Armed Forces) को वक्त पर विमान और हेलीकॉप्टर देना है. HAL के पास करीब ₹2.7 लाख करोड़ के ऑर्डर हैं, जो उसकी सालाना कमाई से आठ गुना ज्यादा हैं. इतने बड़े ऑर्डर का बोझ कंपनी पर ज्यादा पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में देरी हो रही है. सरकार ने इस काम के लिए एक बाहरी सलाहकार कंपनी भी लगा रखी है, जो HAL के कामकाज और ढांचे की जांच कर रही है. इस बीच कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से भी बातचीत हो रही है ताकि पता चले कि क्या बदलाव जरूरी हैं.
कुछ साल पहले भी HAL के ढांचे को बदलने की योजना बनी थी. उस वक्त सोचा गया था कि HAL को तीन अलग-अलग कंपनियों में बांटा जाए. एक कंपनी सिर्फ जेट विमान बनाएगी, दूसरी हेलीकॉप्टरों पर काम करेगी और तीसरी मरम्मत और सर्विसिंग संभालेगी. लेकिन तब HAL के पास इतने बड़े ऑर्डर नहीं थे, इसलिए यह योजना आगे नहीं बढ़ी. अब हालत बदल गई है. HAL पर इतना भारी ऑर्डर है कि कंपनी डिलीवरी में पिछड़ रही है. खासतौर पर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की आपूर्ति में देरी से भारतीय वायु सेना परेशान है. यह देरी देश की रक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है.
HAL का इतना बड़ा कामकाज होने के बावजूद वह नई तकनीक वाले लड़ाकू विमान बनाने के बड़े प्रोजेक्ट एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहा. इस वजह से इस महत्वपूर्ण योजना में भी देरी हो सकती है. सरकार मानती है कि HAL की मौजूदा संरचना में सुधार किए बिना इतने भारी ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होगा. इसलिए कंपनी को फिर से व्यवस्थित करने की जरूरत है ताकि काम तेज और बेहतर तरीके से हो सके और देश की सुरक्षा मजबूती से बनी रहे.
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