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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

February 09, 2026

भागीरथपुरा कांड से पार्षद-अधिकारियों में खुशी
भले ही भागीरथपुरा कांड (Bhagirathpura incident) से 33 घरों के चिराग बुझ गए हों, लेकिन पार्षद (Councillor) और अधिकारियों में खुशी है। खुशी का कारण उनके क्षेत्र में पानी और ड्रेनेज (Drainage) से संबंधित जो काम लंबित पड़े हैं वे धड़ाधड़ हो रहे हंै। शहर का शायद ही कोई ऐसा वार्ड हो जहां गड्ढे न किए गए हो। पार्षदों को इस बात की खुशी है कि उनकी बात तो सुनी जा रही है, वरना निगम अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ते-जोड़ते ये कार्यकाल भी बीत जाता। अब अधिकारी खुश इसलिए हैं कि उन्हें नई लाइन डालने और पानी की जांच के बहाने नया काम मिल गया है। फिर काम होगा तो कमीशन तो पक्का है ना। बस धड़ाधड़ फाइलें सामने आ रही हैं और उन पर बिना कुछ सोचे-समझे मंजूरी हो रही है। बावजूद इसके कई वार्डों में अभी भी साफ पानी सप्लाय नहीं हो रहा है। कमीशन का यह खेल किसी दिन कोई घोटाले के रूप में सामने न आ जाए तो कहना…

निजी आयोजन के लिए चंदा मांग बैठे
भाजपा के एक नगर पदाधिकारी ने पिछले दिनों एक धार्मिक आयोजन किया। आयोजन को भव्य रूप देने के लिए खर्चा ज्यादा था और फिर नेता अगर अपनी जेब से पैसा लगाए तो वो कैसा नेता? बस नेताजी ने प_ों को दौड़ाया और टारगेट पूरा कर लिया, लेकिन नेताजी एक जगह गच्चा खा गए। शहर के एक उद्योगपति के यहां वे पहुंच गए और डिमांड रख डाली। उद्योगपति भी बड़े वाले निकले और सीधे हेमंत खंडेलवाल तक वसूली की शिकायत पहुंचा दी। नेताजी का फिलहाल तो कुछ हुआ नहीं है, लेकिन उनके हावभाव इन दिनों बदले हुए हैं।

आगर का मोह नहीं छोड़ पा रहे विपिन
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े आगर-मालवा से विधायक थे और इंदौर वापसी के बाद भी उनका विधायकी वाला चश्मा उतरा नहीं है। जिले में उनकी सक्रियता की चर्चा है। केवल वे आयोजनों में ही नजर आते हैं, लेकिन अधिकांश समय आगर में बिताते हैं। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि कांग्रेसी खुद बता रहे हैं। वे वहां के जिलाध्यक्ष के कामों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिसकी खबर बड़े नेताओं को दी जा चुकी है। खैर, विपिन की दौड़ अब भी जारी है और उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने का इंतजार है।

छोटे विधायक की लंबी दौड़
गोलू शुक्ला के छोटे पुत्र रुद्राक्ष की दौड़ इन दिनों लंबी देखी जा रही है। रविवार को वॉकथान में युवाओं के जमावड़े ने बता दिया कि रुद्राक्ष में उनके पिता की ही तरह चुम्बकत्व शक्ति है, जो युवाओं को अपनी ओर जोड़े रखती है। छोटे विधायक ने गोलू को भी अपने उन दिनों की याद दिला दी है, जब वे युवा मोर्चा में काम करते थे और उनके एक इशारे पर शहर के हर कोने से युवाओं की फौज चली आती थी। इसी का फायदा उन्हें अब तक के राजनीतिक जीवन में मिला है। खैर, रुद्राक्ष की दौड़ यहीं तक सीमित नहीं है और उन्होंने युवाओं को नशे से दूर करने के संकल्प के साथ पहला बड़ा राजनीतिक कदम मैदान में रखा है।

वाह रे कांग्रेसियों पुण्यतिथि थी, जयंती नहीं
कांग्रेसियों की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो कांग्रेस के ही एक नेता ने उस पर चुटकी ले ली और कटाक्ष कर डाला। दरअसल शहर प्रवक्ता जौहर मानपुरवाला के नंबर से कांगे्रेसियों को संगठन सचिव ने मैसेज भेजा कि 30 जनवरी को गांधी जयंती पर सबको रीगल तिराहे पर इक_ा होना है। नेताद्वय को यही नहीं मालूम कि 30 जनवरी को गांधीजी की पुण्यतिथि है और इसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि बाद में भेजे मैसेज में संशोधन कर दिया गया, पर तब तक तो चिडिय़ा खेत चुग चुकी थी और मैसेज सोशल मीडिया पर चल चुका था। अब भले ही जौहर और बाकलीवाल सफाई देते फिरें, लेकिन जिसे अपना काम करना था वो कर गया।

काका-बाबा न पोरया का मंच
लंबे समय तक आदिवासी अंचलों में काम कर चुके निशांत खरे अब डॉक्टरी के साथ राजनीति को ज्यादा बढ़ावा दे रहे हैं। विधायक व महापौर के टिकट की दावेदारी करने वाले प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत आदिवासियों का क्रिकेट टूर्नामेंट करवा चुके हैं। कल फाइनल था, उसमें तकरीबन सभी भाजपा नेताओं ने हाजिरी लगाई। काका-बाबा न पोरया भी मंच से गूंजा और निशांत का मकसद भी हल हो गया। अब निशांत का अगला निशाना क्या है उसका इंतजार है। वैसे समझने वाले समझ चुके हैं और जो न समझे वो अनाड़ी हैं।

पानी के कारण चढ़ा कांग्रेस का पानी
कांग्रेस की जो रौनक खत्म हो गई थी, वह एक बार फिर से दिखने लगी है। पानी के कारण ही कांग्रेस का पानी वापस दिखने लगा है। भागीरथपुरा कांड को जिस तरह से चिंटू चौकसे ने पकड़ा है और एक के बाद एक आठ आंदोलन कर चुके हैं, उससे घर बैठे कांग्रेसियों में भी जान आ गई है। पिछले दिनों राजबाड़ा पर हुए धरने में इसका उदाहरण देखा जा चुका है। अब एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। हालांकि केवल 16 परिजनों को राहत राशि देकर कांग्रेस खुश है कि उन्होंने बड़ा काम कर दिया है। आधे लोग अभी भी बाकी हैं और वे भी राहत राशि का रास्ता देख रहे हैं, लेकिन कांग्रेसी इस मामले में चुप बैठे हैं। वहीं सरकार से ऐसी मांग कर बैठे हैं कि इसे पूरा करना सरकार के बस में नहीं है।

पिछले दिनों नगर निगम एक मामले से सुर्खियों में आया और अब उसी को लेकर चर्चा आम हो चली है कि जिन नेताजी ने ये बवाल मचाया, वे क्या दूध के धुले हैं जो किसी की नौकरी ले बैठे।
-संजीव मालवीय

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  • पूरे भागीरथपुरा में शुरू होगा नल से नर्मदा का पानी सप्लाई

    Mon Feb 9 , 2026
    लाइन बिछाने का काम हो गया पूरा, निगम ने लिया पानी का नमूना इंदौर। दूषित जल (Contaminated water) हादसे के कारण चर्चित भागीरथपुरा (Bhagirathpura) में हर घर में नर्मदा का पानी (Narmada water) नल (taps) के माध्यम से पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। नगर निगम द्वारा पूरे क्षेत्र में पानी की नई लाइन […]
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