
उज्जैन। साल 2025 के गुजरने में आज से सिर्फ 5 दिन शेष रह गए हैं। इस वर्ष के 360 दिनों में उज्जैन के शासकीय चरक अस्पताल में 6 हजार 518 लोग आवारा श्वानों के काटने का शिकार होकर उपचार के लिए पहुंचे और उन्हें रैबिज के इंजेक्शन लगाए गए। इसके अलावा इस अवधि में 70 लोगों को उनकी पालतू बिल्लियों ने काट लिया। गांवों से भी 15 लोग सियार के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचे।
तत्काल रैबिज संक्रमण का ईलाज जरूरी
पशु चिकित्सक और रैबिज विशेषज्ञों का कहना है कि रैबिज का संक्रमण श्वानों के अलावा बिल्लियों और सियारों से भी फैल सकता है। इसलिए सभी को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने आसपास आवारा जानवरों से दूर रहें और किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत अस्पताल जाकर इलाज कराएं।
ग्रामीण इलाकों में खतरा बढ़ा
ग्रामीण इलाकों में सियारों के हमले की घटनाएं भी बढ़ी हैं। खासकर रात के समय जब लोग खुले में होते हैं, तो सियारों का खतरा अधिक होता है। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचने वाले ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के हमले से पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा जा सकता है और इसके चलते अब गांवों में सुरक्षा को लेकर अधिक चिंता पैदा हो रही है।
चिकितस्कों की समझाईश
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