
1. भारत पर 18 फीसदी टैरिफ हुआ लागू… इन चीजों के Export पर मिली राहत
भारत और अमेरिका (India and America) के बीच एक अंतिरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को अंतिम रूप दे दिया गया है, लेकिन अभी फाइनल डील पर साइन नहीं हुआ है. वहीं अंतिरिम ट्रेड डील के तहत भारत (India) पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) को हटाकर अब 18 फीसदी टैरिफ (18 Percent Tariff) लागू कर दिया गया है. इसका मतलब है कि भारत से अमेरिका जाने वाली चीजों पर अब अधिकतम टैरिफ 18% लागू होगा यानी कि अमेरिका में भारत जाने वाली चीजें काफी सस्ते दामों पर मिल सकती हैं, जिसका असर ये होगा कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश की तुलना में भारत की चीजें अमेरिका में ज्यादा सस्ते दरों पर मिल सकती हैं। इस कदम से भारतीय कारोबारियों को फायदा पहुंचेगा. खासकर छोटे-मध्यम वर्ग के कारोबार को ज्यादा लाभ होगा. इसके साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर डेवलप होंगे. आइए जानते हैं अब वे चीजें, जिनपर 18% तक टैरिफ लागू हो गया है।
अमेरिका (US) ने भारत (India) पर रूसी तेल (Russian oil) खरीद को लेकर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ (Tariff) हटा दिया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि अगर भारत (India) किसी भी जरिए से रूसी तेल खरीदता है तो फिर से टैरिफ लगा दिया जाएगा। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने केंद्र सरकार, भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘ट्रंप कह रहे हैं कि अगर भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल आयात करता है, तो ट्रंप हम पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे। मैं पूछना चाहता हूं कि भारत के पेट्रोलियम मंत्री ट्रंप हैं या हरदीप सिंह पुरी। अब ट्रंप हमें धमकी दे रहे हैं।’
3. भारत के बजट जितना खर्च AI पर, ये 4 कंपनियां बदल देंगी टेक की दुनिया
AI को लेकर जोरो-शोरों से तैयारी चल रही है और इसको लेकर भारी-भरकम इनवेस्टमेंट (Investment) भी हो रहा है. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 में AI को लेकर जितना इनवेस्टमेंट होना है वो रकम भारत (India) में इस साल पूरे देश के खर्चे के बराबर है. यह रकम 650 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में बताया है कि चार बड़ी टेक कंपनियां AI को लेकर 650 बिलियन डॉलर खर्च करने वाली हैं. यह खर्च भारत में आम बजट के बराबर है, जिसमें पूरे देश के विकास और अन्य खर्चों के लिए कुल खर्च करीब 670 बिलियन डॉलर तय किया है.
4. US डील के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे किसान, बताया समझौता क्यों आत्मसमर्पण
भारत और अमेरिका (India and United States) के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. इस डील को कई लोग सही तो कई लोग गलत बता रहे हैं. दूसरी तरफ डील को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को भारतीय कृषि का अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने ‘पूरी तरह आत्मसमर्पण’ बताया है. SKM और अन्य किसान संगठनों ने इस समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए वाणिज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है. इस डील के विरोध में 12 फरवरी की देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं. किसान संगठनों की तरफ से कहा गया कि सरकार किसानों की पीठ में छुरा घोपने का काम कर रही है.
मुंबई (Mumbai) में आयोजित ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ (Mumbai Lecture Series) के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक (chief) मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखी. कार्यक्रम में जाति के सवाल पर उन्होंने कहा कि संघ में किसी भी जाति का व्यक्ति सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है. उनके मुताबिक अनुसूचित जाति या जनजाति होना कोई बाधा नहीं है और ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं है. उन्होंने माना कि संघ की शुरुआत में ब्राह्मणों की संख्या अधिक थी, लेकिन संगठन सभी जातियों के लिए काम करता है. कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि RSS की फंडिंग को लेकर लोगों में जिज्ञासा रहती है, लेकिन संगठन मुख्य रूप से अपने स्वयंसेवकों के सहयोग से चलता है. उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कार्यकर्ता बाहर खाने के बजाय स्वयंसेवकों के घर ठहरते हैं और उनके द्वारा दिए गए भोजन से काम चलाते हैं.
भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौता दोनों देशों के रिश्ते को और बेहतर व नई दिशा देने की संभावना के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में अब केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को लेकर एक बार फिर अपनी प्रतिक्रिया दी है। रविवार को उन्होंने कहा कि भारत को अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने में कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने इसे बहुत ही सुरक्षित बताया, क्योंकि उनका मानना है कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था अगले पांच साल में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की मांग पैदा करेगी।
7. 11 साल बाद वकीलों की केंद्र सरकार ने बढ़ाई फीस, अब हर केस के मिलेंगे इतने हजार रुपये
केंद्र सरकार (Central Government) का अदालतों (Court) में पक्ष रखने वाले वकीलों (Advocates) के लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय कानून मंत्रालय (Union Ministry of Law) ने देशभर की अदालतों में सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों की फीस बढ़ा दी है। यह बढ़ोतरी करीब 11 साल के लंबे इंतजार के बाद की गई है। इस फैसले से उन हजारों वकीलों को फायदा होगा जो केंद्र सरकार के लिए काम करते हैं। कानून मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग ने 5 फरवरी को एक अधिसूचना जारी की। इसमें वकीलों की बढ़ी हुई फीस की जानकारी दी गई है। यह फैसला लंबे समय से लंबित था और वकील इसकी मांग कर रहे थे।
मध्यप्रदेश कांग्रेस (Congress) ने संगठन (Organization) को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए जिला इकाइयों पर सख्ती बढ़ा दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने भोपाल संभाग के सभी जिला अध्यक्षों (District Presidents) को साफ निर्देश दिए हैं कि पंचायत और वार्ड स्तर की कमेटियों का गठन तय समय सीमा में पूरा किया जाए। प्रदेश कार्यालय इंदिरा भवन में रविवार को हुई बैठक में कहा गया कि सभी जिला अध्यक्ष 20 फरवरी तक पंचायत और वार्ड कमेटियों की सूची संगठन को सौंपें। जिन जिलों ने अब तक मंडल कमेटियों की सूची नहीं भेजी है, उन्हें 5 दिन के भीतर सूची तैयार कर जमा करने का निर्देश दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) रविवार को मलेशिया (Malaysia) का दो दिवसीय दौरा पूरा करने के बाद भारत (India) के लिए रवाना हो गए। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (PM Anwar Ibrahim) ने उन्हें भावुक विदाई दी। रवानगी से पहले पीएम मोदी ने अपने समकक्ष अनवर इब्राहिम के साथ व्यापक बातचीत की, जिसमें रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर मुख्य फोकस रहा। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “एक यादगार दौरा समाप्त! मलेशिया के सफल दौरे के बाद, जिसमें विशेष आत्मीयता, आतिथ्य और हमारे घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती दिखी पीएम मोदी भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। इस दौरे से भारत-मलेशिया संबंधों को मजबूती देने वाले महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदुओं की स्थिति पर एक कड़ा मैसेज देते हुए कहा कि अगर बांग्लादेश की हिंदू आबादी अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और लड़ने का फैसला करती है, तो उन्हें दुनिया भर के हिंदुओं का साथ मिलेगा. मुंबई में RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर लेक्चर सीरिज के दूसरे दिन मोहन भागवत ने कहा, ‘बांग्लादेश में करीब 1.25 करोड़ हिंदू हैं. अगर वे वहीं रहने और लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं की जो संख्या है, उसके बल पर वे अपनी स्थिति में बड़ा सुधार ला सकते हैं. इस दिशा में हम यहां अपनी सीमाओं के भीतर रहकर और दुनिया भर के हिंदू अपने-अपने स्थानों से, जो भी संभव होगा, वह मदद करेंगे – इसकी मैं गारंटी देता हूं,.’
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