
इंदौर: 15 दिन पहले वन विभाग (Forest Department) ने रतलाम (Ratlam) की गलियों में घूमते दिखाई दिए अजीबो गरीब जीव का रेस्क्यू किया था. और उसे इंदौर (Indore) रालामंडल (Ralamandal) लाया गया था, जहां पर उसका विशेष तौर पर ध्यान रखा जा रहा है. तस्करी (Smuggling) की आशंका के चलते सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. वन विभाग के कर्मचारी निगरानी कर रहे हैं, पैंगोलिन (Pangolin) के आने के बाद रालामंडल वन विभाग ने पर्यटकों (Tourists) को भी प्रतिबंध (Ban) कर दिया है. वन्य कमी भी सुरक्षा के लिए आज से एक दो बार दिन में गश्त भी करते हैं.
23 अक्टूबर को वन्य अधिकारी पैंगोलिन को रालामंडल वन्य अभ्यारण लेकर पहुंचे थे अजीबो गरीब जीव को 234 सेक्टर वाले इलाके में छोड़ गया है जहां पर उसे आसानी से भोजन पानी मिल जाए पैंगोलिन की डिमांड विदेश में ज्यादा है और इसका उपयोग दवाई बनाने के लिए किया जाता है वियतनाम चीन जैसे देशों में इसका खून हड्डी मांस अलग-अलग बिकता है और कैंसर जैसी घातक दवाइयां को बनाने में इसका उपयोग किया जाता है इसकी त्वचा साल्व केराटिन से बने होते हैं जो मनुष्य के नाखून और बालों में पाए जाने वाला तत्व है विदेशों में माना जाता है कि पैंगोलिन कई बीमारियों के उपचार में सहायक होता है पैंगोलिन जिसे भारत में वज्रशलक या सल्लू सांप भी कहा जाता है फोलिडोटा गण का एकमात्र शल्युक्त स्तनधारी जीव है ये एशिया और अफ्रीका दोनों महाद्वीपों में पाया जाता है पैंगोलिन दुनिया का सबसे अधिक तस्करी वाला जीव है भारत नेपाल श्रीलंका और भूटान के मैदानों ओर पहाड़ी इलाकों में पाया जाता ओर अंतराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की कीमत हैं