
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने व्हाइट हाउस (White House) के ओवल ऑफिस से चौंकाने वाला बयान दिया, जिसमें उन्होंने गर्भवती महिलाओं (Pregnant women) को टाइलनॉल (पैरासिटामोल) लेने से सख्ती से मना कर दिया। उनका दावा था कि इस दवा का सेवन ऑटिज्म का कारण बन सकता है। ट्रंप ने कहा, ‘टाइलनॉल मत लीजिए। बच्चे के जन्म के बाद भी मत दीजिए।’ अब मेडिकल एक्सपर्ट्स इस बयान को कॉमन सेंस पर आधारित बता रहे हैं और इसे खारिज कर रहे हैं। टाइलनॉल बनाने वाली कंपनी केनव्यू ने कहा कि इस दावे के पीछे कोई विश्वसनीय विज्ञान नहीं है। सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल और अन्य स्वास्थ्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि ऐसे बयान माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकते हैं। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि अध्ययनों से एसिटामिनोफेन (टाइलनॉल का सक्रिय तत्व) और ऑटिज्म के बीच संबंध दिखता है। मगर, विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन शुरुआती है और कारण व प्रभाव साबित नहीं करता।
ट्रंप का यह बयान उनके पहले कार्यकाल और दूसरे कार्यकाल के 8 महीनों में की गई विवादास्पद स्वास्थ्य टिप्पणियों की याद दिलाता है। 2020 में उन्होंने कोविड-19 के मरीजों में डिसइन्फेक्टेंट इंजेक्ट करने का सुझाव दिया था, जो वैज्ञानिक रूप से असंभव और खतरनाक था। अब स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ कैनेडी की नियुक्ति के बाद प्रशासन वैक्सीन प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव की बात कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि बच्चों को दिए जाने वाले कई वैक्सीन असुरक्षित हैं और इनकी समयबद्धता व संख्या पर फिर से विचार जरूरी है। एमएमआर वैक्सीन (खसरा, कंडा और रूबेला के लिए) को अलग-अलग शॉट्स में विभाजित करने, हेपेटाइटिस बी शॉट को एक दशक से अधिक देरी करने जैसे बदलाव सुझाए गए। मगर, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये परिवर्तन बच्चों को रोकी जाने वाली बीमारियों के प्रति असुरक्षित बना देंगे।
कोरोना वैक्सीन को लेकर क्या कहा जा रहा
वैक्सीन पर कैनेडी के दावे और भी चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कोविड वैक्सीन को अब तक का सबसे घातक कदम बताया, जबकि सीडीसी ने किशोरों और युवाओं में हृदय संबंधी जटिलताओं के लिंक को खारिज किया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे बयान वैक्सीन हिचकिचाहट बढ़ाएंगे, जो बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकता है। एक्सप्लेन्ड रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऑटिज्म के मामलों में वृद्धि जेनेटिक्स, पर्यावरणीय कारकों और बेहतर निदान से जुड़ी है, न कि वैक्सीन या टाइलनॉल से। पूर्व डब्ल्यूएचओ प्रमुख वैज्ञानिक ने ट्रंप के दावों को कोविड फ्लैशबैक करार दिया, जो बिना सबूत के मेडिकल सलाह देने जैसा है।
कच्चा दूध कितना हो सकता है घातक?
रॉबर्ट एफ कैनेडी के विवादों में कच्चा दूध (रॉ मिल्क) का मुद्दा भी शामिल है। जून 2024 में उन्होंने कहा था कि वे केवल पाश्चराइज्ड दूध पीते हैं, जो बैक्टीरिया से भरपूर होता है। पाश्चराइजेशन प्रक्रिया हानिकारक सूक्ष्मजीवों को मारकर दूध को सुरक्षित बनाती है। एफडीए और सीडीसी ने चेतावनी दी है कि रॉ मिल्क में सैल्मोनेला, ई. कोलाई, लिस्टेरिया जैसे जीवाणु हो सकते हैं, जो कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए घातक हैं। अमेरिका में करीब 30 राज्य रॉ मिल्क की बिक्री की इजाजत देते हैं, लेकिन संघीय कानून अंतरराज्यीय व्यापार पर रोक लगाता है।
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