
वाराणसी । धर्म नगरी काशी (Kashi) में गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) पर बुधवार को गिने-चुने श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर दान पुण्य किया। कोरोना संक्रमण (Corona infection) काल और तिथियों के हेरफेर के चक्कर में घाटों के किनारे रहने वाले श्रद्धालुओं ने ही गंगा स्नान किया। आम दिनों में गंगा सप्तमी पर गंगा में स्नान के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ता है। लेकिन कोरोना के चलते और सुरक्षा सम्बंधी बंदिशों के चलते लगातार दूसरी बार भी श्रद्धालु गंगा स्नान (Ganges bath) नहीं कर पाये। इसके चलते बुजुर्ग श्रद्धालु काफी मायूस भी रहे।
गौरतलब हो कि गंगा सप्तमी वैशाख शुक्ल पक्ष की मध्याह्न व्यापिनी सप्तमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस बार वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 18 मई मंगलवार को दिन में 12:33 पर लगी। जो अगले दिन 19 मई बुधवार को दिन में 12:51 तक रहेगी।
नगर के ज्योतिषविद मनोज पाठक ने बताया कि सनातन धर्म में कोई भी त्यौहार उदया (सूर्योदय) तिथि से माना जाता है। ऐसे में गंगा सप्तमी का स्नान बुधवार को अलसुबह से दोपहर तक मान्य है।
उन्होंने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं से धरती पर अवतरित हुई थींं। गंगा सप्तमी के अवसर पर मां गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा में डुबकी लगाने मनुष्य सभी दुखों से मुक्ति पा जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में गंगा सप्तमी श्रद्धा भक्ति भाव से मनाने की धार्मिक मान्यता रही है। गंगा सप्तमी गंगा की पूजा के लिए समर्पित है। शाम को मां गंगा की अर्चना के बाद ‘दीप दान’ भी गंगा तट पर किया जाता है।
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