
बरेली. बरेली (Bareilly) के थाना बिशारतगंज अंतर्गत मोहम्मदगंज गांव (Mohammadganj village) में 17 जनवरी को हसीन मियां (Haseen Mian) के मकान में सामूहिक नमाज (Congregational prayer) पढ़ने के बाद विवाद की शुरुआत हुई. पुलिस ने इस मामले में शांति भंग करने के आरोप में 12 लोगों का चालान किया, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कानूनी प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद 14 फरवरी को उसी स्थान पर दोबारा नमाज अदा की गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई. हिंदू पक्ष का कहना है कि गांव में कभी भी मंदिर या मस्जिद नहीं रहे हैं और अब नई परंपरा डालकर उन पर दबाव बनाया जा रहा है. पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की है.
दशकों पुराना समझौता और नई परंपरा का विवाद
गांव वालों के मुताबिक, मोहम्मदगंज में दशकों पहले एक अनोखा समझौता हुआ था कि गांव की शांति बनाए रखने के लिए यहां न तो कोई मंदिर बनेगा और न ही मस्जिद. इसी नियम के तहत लोग अपने घरों में ही पूजा और नमाज अदा करते आ रहे थे. हिंदू पक्ष का आरोप है कि अब हसीन मियां के घर को अवैध रूप से अस्थाई मस्जिद का रूप दिया जा रहा है. उनका कहना है कि यह नई परंपरा कानून के विरुद्ध है और इससे गांव का माहौल खराब हो रहा है.
विवाद इतना बढ़ गया है कि रूपवती सहित कई हिंदू ग्रामीणों ने अपना घर बेचकर गांव से जाने की बात कही है. उनका आरोप है कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है और कमेंट्स किए जा रहे हैं. वहीं, मुस्लिम पक्ष और ग्राम प्रधान आरिफ का कहना है कि वे 20-25 साल से घरों में नमाज पढ़ रहे हैं. उनका दावा है कि जुम्मे के दिन वे साथ नमाज पढ़ते हैं और उन्होंने हमेशा कांवड़ यात्रा में सहयोग किया है. उनके अनुसार, बाहरी संगठन आकर गांव का सौहार्द बिगाड़ रहे हैं.
हिंदू संगठनों का विरोध
राष्ट्रीय हिंदू दल और बजरंग दल के पदाधिकारी अजीत राठौर ने इसे गैर-कानूनी बताते हुए मांग की है कि नई परंपरा को तुरंत बंद किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि दोबारा नमाज पढ़कर उसका वीडियो वायरल किया गया है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दूसरी ओर, एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा और एसओ सतीश ने स्पष्ट किया कि गांव में पुलिस बल तैनात है और फिलहाल शांति व्यवस्था कायम है. प्रशासन ने पलायन की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि दोनों पक्षों से बातचीत कर उन्हें शांत करा दिया गया है.
कोर्ट के फैसले का इंतजार
ग्राम प्रधान आरिफ का कहना है कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे और फिलहाल पुलिस के निर्देशों का पालन कर रहे हैं. हालांकि, हिंदू पक्ष अब भी डरा हुआ है और उनका कहना है कि अगर जबरन नमाज बंद नहीं हुई तो वे सब कुछ बेचकर चले जाएंगे. गांव में 35 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और बाकी हिंदू समाज है. फिलहाल सबकी नजरें हाई कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि मामला अब आस्था और पुराने सामाजिक समझौते के बीच फंस गया है.
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