लॉस एंजिल्स। अमेरिकी कृषि नेताओं (American agricultural leaders) और प्रमुख संगठनों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा प्रशासन की नीतियों के चलते अमेरिकी कृषि क्षेत्र गंभीर संकट की ओर बढ़ सकता है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के 27 पूर्व नेताओं और प्रमुख कृषि संघों ने हाल ही में कांग्रेस को पत्र भेजकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने खेती को “बहुत नुकसान” पहुंचाया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि यदि यह नीति जारी रहती है, तो अमेरिकी कृषि के बड़े पैमाने पर पतन का खतरा है, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसमें कहा गया कि खेती में इनपुट की लागत बढ़ाना अमेरिकी किसानों की जेब से पैसा निकालना है। पत्र में आगे कहा गया है कि इस प्रशासन की व्यापार नीतियों और कांग्रेस की कार्रवाई की कमी ने हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करके, निर्यात बाजारों को बाधित करके और कमोडिटी कीमतों को कम करके अमेरिकी किसानों को भी नुकसान पहुंचाया है।
इससे पहले भी दो बार दी गई थी चेतावनी
यह दो पिछली चेतावनियों के बाद आया है। पहली चेतावनी अक्टूबर 2025 में 215 से अधिक कृषि संगठनों का एक पत्र के जरिए दी गयी और बाद में इस साल 15 जनवरी को 56 कृषि समूहों का एक पत्र जारी किया गया। इनमें देश में बिगड़ती कृषि अर्थव्यवस्था के मुख्य कारणों के रूप में व्यापार संरक्षणवाद, श्रम की कमी और संघीय कर्मचारियों की छंटनी का हवाला दिया।
कांग्रेस नेतृत्व को जनवरी के पत्र में चेतावनी दी गई थी कि बड़ी संख्या में किसान आर्थिक रूप से कर्ज में डूबे हुए हैं, फार्म दिवालियापन लगातार बढ़ रहा है, और कई किसानों को अपनी अगली फसल उगाने के लिए धन हासिल करने में कठिनाई हो सकती है। इसमें कहा गया है कि पिछले तीन से चार सालों में किसानों को ‘पूरे देश में नकारात्मक लाभ और लगभग सौ बिलियन डॉलर का नुकसान’ हो रहा था। अमेरिकी सीनेट कृषि समिति के चेयरमैन जॉन बूज़मैन ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान कहा कि किसान ‘पैसे खो रहे हैं, बहुत सारा पैसा।’
2025 में 52 फीसदी किसान मुनाफे में
अमेरिकन बैंकर्स एसोसिएशन और फार्मर मैक के एक सर्वे किए गए कृषि कर्जदाताओं ने बताया कि 2025 में सिर्फ 52 प्रतिशत किसान कर्जदार ही मुनाफे में थे, और उन्होंने अनुमान लगाया कि 2026 में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से नीचे गिर जाएगा। इंडस्ट्री के नेताओं ने ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा संकट कुछ साल पहले रिकॉर्ड किए गए रिकॉर्ड एक्सपोर्ट सरप्लस और खेती की इनकम से बिल्कुल उलट है।
इसका एक मुख्य कारण इंटरनेशनल मार्केट शेयर में कमी है। 2018 में यूनाइटेड स्टेट्स का ग्लोबल सोयाबीन मार्केट में 47 प्रतिशत हिस्सा था, लेकिन आज यह घटकर 24.4 प्रतिशत रह गया है। इसी दौरान ब्राजील ग्लोबल मार्केट शेयर में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़त हासिल करके दुनिया का सबसे बड़ा कृषि एक्सपोर्टर बन गया है।
नेशनल कॉर्न ग्रोअर्स एसोसिएशन के पूर्व चीफ़ एग्जीक्यूटिव जॉन डॉगेट ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हालांकि घरेलू कृषि उत्पादक कुशल हैं, लेकिन वे ‘नीति के अव्यवस्थित होने से दुनिया से मुकाबला नहीं कर सकते। यह भी कहा गया है कि बीज, ईंधन और रखरखाव की लागतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। दूसरे देशों से आने वाले उर्वरक और मशीनरी पार्ट्स पर शुल्क ने इन खर्चों को सामान की कीमतों से भी ज्यादा कर दिया है।
जनवरी के पत्र में क्या?
जनवरी के पत्र में कहा गया था कि हालांकि सरकार का फार्मर ब्रिज असिस्टेंस प्रोग्राम और दूसरे उपाय एक सार्थक पहला कदम हो सकते हैं, लेकिन वे पिछले कई सालों में किसानों को हुए बड़े और लगातार नुकसान को कवर नहीं करते हैं। कांग्रेस से 56 संगठनों ने आग्रह किया कि ‘खेत और खास फसलों दोनों के किसानों के लिए बचे हुए नुकसान की भरपाई के लिए तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए।’ 215 संगठनों ने अक्टूबर 2025 के अपने पत्र में कहा कि एच-टूए वीजा प्रोग्राम, जो विदेशी नागरिकों को अमेरिका की खेती में अस्थायी रूप से काम करने की इजाजत देता है, बड़े पैमाने पर देश निकाला और सुधार की कमी से जूझ रहा है।
बिना दस्तावेज वाले मजदूर कुल खेती के कार्यबल का 42 प्रतिशत हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इन मज़दूरों को हटाने से चीजें बर्बाद हो रही हैं और लागत बढ़ रही है। अकेले डेयरी और मांस प्रोसेसिंग सेक्टर में, मजदूरों की कमी से उत्पादन में काफी रुकावटें आ रही हैं। अपने आखिरी बयान में, 27 कृषि नेताओं ने खेती के सामान पर टैरिफ से तुरंत छूट देने और उन नीतियों को पलटने की मांग की, जिनसे अमेरिकी किसानों को नुकसान हुआ है। यह न सिर्फ रोजी-रोटी का नुकसान है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए जीवन जीने के तरीके का भी नुकसान है। और जब अमेरिकी किसानों को नुकसान होता है, तो पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। 56 संगठनों के जनवरी के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया था कि ये रूझान सिर्फ आंकड़े नहीं हैं; ये ग्रामीण अमेरिका में एक आर्थिक संकट को दिखाते हैं।

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