
नई दिल्ली। आज हो रहे उपराष्ट्रपति चुनाव ((Vice President election)) पर पूरे देश की निगाहें हैं, जहां केंद्र में सत्तारूढ़ NDA के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन (C P Radhakrishnan) के सामने इंडिया गठबंधन (India Alliance) के साझा उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी (Joint Candidate B Sudarshan Reddy) चुनौती पेश कर रहे हैं। चुनाव का फैसला सांसदों द्वारा की गई वोटिंग के जरिए होगा। मंगलवार को मतदान के तुरंत बाद विजेता की घोषणा भी कर दी जाएगी। हालांकि यह मतदान और वोटों की गिनती की प्रकिया देश में होने वाले अन्य चुनावों से अलग है। उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान वोटिंग के लिए EVM का उपयोग नहीं किया जाता है। आइए जानते हैं क्या है इसकी वजह।
उपराष्ट्रपति चुनाव और राष्ट्रपति चुनाव में विजेता को चुनने के लिए एक अलग प्रकिया अपनाई जाती है। अब तक पांच लोकसभा चुनाव और 130 से अधिक विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की जा चुकी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा और राज्य विधान परिषद चुनावों में नहीं किया जा सकता। इसकी वजह यह है कि ये मशीन लोकसभा और विधानसभाओं जैसे प्रत्यक्ष चुनावों में मत संग्रहक के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन की गई हैं, जिसमें मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के नाम के सामने वाला बटन दबाते हैं और सबसे ज्यादा वोट पाने वाले को निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
हालांकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव एकल संक्रमणीय मत (सिंगल ट्रांसफेरेबल वोट) के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार होते हैं। आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के माध्यम से हर मतदाता उतनी ही वरीयताएं अंकित कर सकता है, जितने उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे होते हैं।
नामों के सामने वरीयता तय करते हैं उम्मीदवार
उम्मीदवारों के लिए ये प्राथमिकताएं मतदाता द्वारा बैलेट पेपर के कॉलम 2 में दिए गए स्थान में उम्मीदवारों के नामों के सामने वरीयता क्रम में 1, 2, 3, 4, 5… अंक दर्ज करके अंकित की जाती हैं। अधिकारियों के मुताबिक ईवीएम इस मतदान प्रणाली को पंजीकृत करने के लिए डिजाइन नहीं की गई हैं। EVM मत संग्रहक होती हैं और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत मशीन को वरीयता के आधार पर मतों की गणना करनी होगी और इसके लिए एक बिलकुल अलग तकनीक की आवश्यकता पड़ेगी। दूसरे शब्दों में, एक अलग प्रकार की EVM की आवश्यकता होगी।
उपराष्ट्रपति चुनाव में कैसे होता है विजेता का चयन?
उपराष्ट्रपति चुनाव में सभी सांसद हिस्सा लेते हैं और वे गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को क्रमवार प्राथमिकता देते हैं, जैसे 1, 2, 3 आदि। चुनाव की पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की देखरेख में संपन्न होती है। आयोग एक रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त करता है, जो आमतौर पर संसद का कोई वरिष्ठ अधिकारी होता है। वह मतदान प्रक्रिया का संचालन करता है। किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कुल वैध मतों का आधे से अधिक यानी बहुमत प्राप्त करना अनिवार्य है। अगर प्रथम वरीयता के आधार पर कोई भी उम्मीदवार बहुमत नहीं हासिल करता है, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को चुनाव से बाहर कर दिया जाता है और उसके मत अगली पसंद के आधार पर अन्य उम्मीदवारों को स्थानांतरित कर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं कर लेता।
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