
नई दिल्ली: हॉरर फिल्मों की दुनिया (the world of horror cinema)में अगर किसी फिल्म ने हाल के वर्षों में खास पहचान बनाई है तो वह है तुम्बाड (Tumbbad)जिसका निर्देशन (director) राही अनिल ब(Rahi Anil Barve) ने किया था। अब इसी निर्देशक ने एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज़ से दर्शकों को चौंका दिया है। इस बार उन्होंने एक ऐसी (horror) फिल्म बनाई है जिसका प्रोजेक्ट (zero budget) चल रहा है और खास बात यह है कि इसे देखने के लिए आपको एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
इस फिल्म का नाम मैन पिशाच है जो पूरी तरह से एक एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट है। राही अनिल बर्वे ने आर्टिफिशियल इंस्टीट्यूट की मदद से यह फिल्म तैयार की है। उन्होंने इसे 17 मार्च को रिलीज किया और इसके साथ ही उन्होंने अपने एक्सपीरियंस को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया।
सबसे खास बात यह है कि इस फिल्म को दर्शक घर बैठे बिल्कुल मुफ्त में देख सकते हैं। इसे यूट्यूब पर उपलब्ध कराया गया है, जहां किसी भी तरह के टिकट या सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं है। इस कदम ने दुनिया भर में फिल्मों की एक नई चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि आम तौर पर फिल्मों को बनाने में भारी बजट और बड़ी टीम की जरूरत होती है।
राही अनिल बर्वे ने बताया कि यह प्रोजेक्ट उन सभी लोगों के लिए है जो कम से कम इसमें फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक इंसान अपने पर्सनल कंप्यूटर पर अकेले 80 मिनट की फिल्म बना सकता है। उनका मानना है कि अगर कल्पनाशक्ति और मेहनत हो तो ऐसा संभव है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की फिल्म बनाने के लिए कुछ जरूरी चीजें शामिल हैं जैसे कि मजबूत ताकत की क्षमता, कमजोर सोच, एक शक्तिशाली लैपटॉप, और सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप आफ्टर इफेक्ट्स या प्रीमियर। लेकिन इसमें सबसे जरूरी है धैर्य और लग्न क्योंकि इसके बिना कोई भी बड़ा काम सफल नहीं हो सकता।
मैन पिशाच की कहानी एक रहस्यमयी और भयानक राक्षस के विपरीत गिर घूमती है। इसमें एक फोटोग्राफर अधिकारी की कहानी दिखाई गई है जो एक ऐसे गांव में दिखता है जहां अजीब नियम और रहस्यमय घटनाएं उसका इंतजार कर रही हैं। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ती है, उसे इस तरह के अपमान का सामना करना पड़ता है, जो उसे मानसिक और वैज्ञानिक रूप से परेशान कर देता है।
फिल्म का चलने का समय लगभग 1 घंटा 20 मिनट है और इसके विजुअल्स काफी खराब चल रहे हैं। खास बात यह है कि बिना बड़े बजट के भी एक प्रभावशाली भयानक अनुभव देने की कोशिश की गई है। सोशल मीडिया पर दर्शक इस फिल्म की लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं और कई लोग इसे फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक प्रेरणा बता रहे हैं।
इसी तरह राही अनिल बर्वे ने यह साबित किया है कि सीमित फिल्मों में भी बड़ा और अस्थायी सिनेमा बनाया जा सकता है। उनकी यह फिल्म नए फिल्म निर्माताओं के लिए एक मिसाल बन सकती है जो कम बजट में अपने सपने को साकार करना चाहते हैं।
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