
नई दिल्ली: अमेरिका (America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पहले तो मनमाना टैरिफ (Tariff) लगा दिया. अब उन्होंने टैरिफ घटाने के लिए साउथ कोरिया (South Korea) को एक ऐसी डील ऑफर की है, जिसे सुनकर हर किसी को अजीब लगेगा. इसके कारण अमेरिका और साउथ कोरिया के बीच व्यापार समझौते को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सियोल से 350 अरब डॉलर कैश देने की मांग कर दी है. लेकिन साउथ कोरिया ने इसे नामुमकिन बताते हुए कहा है कि इतनी बड़ी रकम नकद में देना देश की इकॉनमी को हिला देगा. दोनों देशों के बीच जुलाई में टैरिफ कटौती पर बनी सहमति अब संकट में फंसती दिख रही है.
जुलाई में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका ने साउथ कोरिया के सामान पर लगने वाले टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी करने पर हामी भरी थी. बदले में सियोल ने 350 अरब डॉलर अमेरिकी प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का वादा किया था. यह रकम लोन, गारंटी और इक्विटी के जरिए दी जानी थी. लेकिन ट्रंप ने अब कहा कि यह पैसा सीधे कैश में चाहिए. ट्रंप ने यहां तक दावा किया कि जापान 550 अरब डॉलर और साउथ कोरिया 350 अरब डॉलर पहले ही कैश में देने वाले हैं.
साउथ कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वी सुंग-लाक ने साफ कहा कि 350 अरब डॉलर नकद देना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है. राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने भी चेताया कि इतनी बड़ी कैश पेमेंट से देश की इकॉनमी डगमगा सकती है. उनके अनुसार, साउथ कोरिया के पास करीब 410 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है और एकमुश्त भुगतान से गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा. ली ने सुझाव दिया कि अगर सौदा आगे बढ़ाना है तो मुद्रा विनिमय (करेंसी स्वैप) जैसी सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे.
फिलहाल दोनों देशों के बीच वार्ता अटकी हुई है. सबसे बड़ी बाधा यह है कि अमेरिकी पक्ष फंड्स पर सीधा नियंत्रण चाहता है, जबकि साउथ कोरिया इसका विरोध कर रहा है. अब सारी निगाहें अगले महीने होने वाले एशिया-पैसिफिक इकनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) समिट पर टिकी हैं, जिसकी मेजबानी सियोल करेगा और ट्रंप भी इसमें शामिल होंगे. कोरियाई नेतृत्व को उम्मीद है कि इस मंच पर दोनों देशों के बीच कोई संतुलित समाधान निकल सकता है.
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