
नई दिल्ली। अगले सप्ताह सोना और चांदी (Gold and Silver) में सीमित दायरे में ही कारोबार (Business) देखने को मिल सकता है। निवेशकों (Investors) की नजर पश्चिम एशिया (West Asia) के भू-राजनीतिक हालात और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी, क्योंकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इन कारकों से ही कीमती धातुओं की दिशा तय होगी। इस हफ्ते जेरोम पॉवेल के संबोधन और अन्य फेड अधिकारियों के बयान विशेष अहमियत रखेंगे। इन बयानों से ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के संकेत मिल सकते हैं, जो सोने-चांदी की मांग को प्रभावित करेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार सोने में हालिया गिरावट का कारण गोल्ड ईटीएफ निवेशकों की बिकवाली, कमजोर भौतिक मांग, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 2% गिरकर 4,492.5 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी हल्की बढ़त के साथ 69.79 डॉलर प्रति औंस पर रही। अमेरिकी बाजार में कमजोरी से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी, जिससे चांदी को सहारा मिला, लेकिन बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊंचे तेल दामों के कारण पारंपरिक मांग सीमित रही।
घरेलू बाजार में हालिया रुझान
पिछले सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू वायदा बाजार में सोना मामूली गिरावट के साथ करीब 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 1,182 रुपये की बढ़त के साथ 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। रुपये की कमजोरी ने सोने-चांदी की कीमतों को कुछ सहारा दिया। पिछले हफ्ते रुपया 1% से अधिक गिरकर करीब 94.80 प्रति डॉलर पर आ गया था।
अगले सप्ताह नजर इन कारकों पर
जेएम फाइनेंशियल के प्रणव मेर के अनुसार, अगले सप्ताह निवेशकों की निगाह पश्चिम एशिया की घटनाओं पर बनी रहेगी। किसी भी तरह के तनाव के बढ़ने या घटने के संकेत बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण आंकड़े, यूरोज़ोन के महंगाई आंकड़े और अमेरिकी खपत व रोजगार डेटा भी कीमती धातुओं की चाल तय करेंगे। घरेलू बाजार में सुस्ती की संभावना है, क्योंकि 31 मार्च और 3 अप्रैल को महावीर जयंती और गुड फ्राइडे के चलते बाजार बंद रहेंगे।
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