
नई दिल्ली । 70 और 80 के दशक में मास्टर राजू उर्फ राजू श्रेष्ठा (Master Raju alias Raju Shrestha) चाइल्ड आर्टिस्ट(Child Artist) के तौर पर इंडस्ट्री का बड़ा नाम थे। यश चोपड़ा, (Yash Chopra)बसु चटर्जी जैसे दिग्गज निर्देशकों की फिल्मों में काम कर चुके राजू उस दौर में इतने व्यस्त थे कि लगभग हर तीसरी फिल्म में नजर आते थे। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर के सुनहरे दिनों को याद करते हुए अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan)से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा (interesting story)साझा किया।
सिद्धार्थ कनन से बातचीत में मास्टर राजू ने बताया कि फिल्म ‘फरार की शूटिंग के दौरान हालात ऐसे थे कि अमिताभ बच्चन को उनके लिए इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने हंसते हुए कहा, अमित जी बहुत वक्त के पक्के हैं, लेकिन उस समय उनके पास मुझसे कम काम होता था। मुझे ये कहते हुए भी अजीब लगता है, पर सच यही है। वो समय पर सेट पर पहुंच जाते थे और उनके क्लोज-अप शॉट्स पहले ले लिए जाते थे। लेकिन जैसे ही मैं सेट पर पहुंचता था, प्राथमिकता बदल जाती थी।
राजू ने बताया कि उनका शेड्यूल बेहद टाइट होता था और उन्हें कुछ ही घंटों में दूसरे सेट पर निकलना होता था। ऐसे में प्रोडक्शन टीम उनके सीन पहले शूट करती थी। उन्होंने कहा, जब मैं आता था तो अमित जी को एक तरफ बैठने को कहा जाता था, क्योंकि मेरे शॉट्स पहले पूरे करने होते थे। मेरे काम खत्म होने के बाद ही उनके बाकी क्लोज-अप्स लिए जाते थे।
मास्टर राजू ने उसी फिल्म से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि ‘फरार के सेट पर उनकी मां ने अमिताभ बच्चन को डांट दिया था। एक सीन में अमिताभ बच्चन को हाथ का घाव दिखाना था, जिस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। उसी दौरान लंच ब्रेक चल रहा था। राजू ने बताया, हम खाना खा रहे थे और मेरी मां ने अमित जी से कहाप्लीज इसे ढक लीजिए, मक्खियां हर जगह उड़ रही हैं और हम खाना खा रहे हैं। यह सुनकर सेट पर मौजूद लोग मुस्कुरा उठे।
हालांकि मास्टर राजू ने यह भी साफ किया कि अमिताभ बच्चन उस दौर के सबसे अनुशासित कलाकारों में से एक थे। उन्होंने कहा, उस समय स्टार्स का लेट आना आम बात थी। विनोद खन्ना, संजीव कुमार, राजेश खन्ना और यहां तक कि धर्मेंद्र जी भी अक्सर देरी से आते थे। मुझे लगता है कि अमिताभ जी को छोड़कर लगभग सभी देर से आते थे। उस दौर में देर से आना एक तरह का फैशन था।
मास्टर राजू के इन खुलासों से उस दौर की फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली की झलक मिलती है। साथ ही यह भी पता चलता है कि एक समय ऐसा था जब एक चाइल्ड आर्टिस्ट की लोकप्रियता और व्यस्तता इतनी थी कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को भी उनके शेड्यूल के हिसाब से काम करना पड़ता था।
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