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जब किसानों के 2-2 रुपये से बनी थी फिल्म मंथन, रच दिया गया था इतिहास और जीते गए दो नेशनल अवॉर्ड

February 02, 2026

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई यादगार फिल्में बनी हैं, लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जो अपनी कहानी के साथ-साथ अपने बनने के तरीके के कारण भी मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फिल्म थी मंथन, जो साल 1976 में रिलीज हुई थी। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि किसानों की आवाज़, उनके संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी थी, जिसे खुद किसानों ने अपने पैसे से बनाया था।

फिल्म ‘मंथन’ का निर्देशन दिग्गज फिल्ममेकर श्याम बेनेगल ने किया था और इसकी कहानी उन्होंने मशहूर लेखक विजय तेंदुलकर के साथ मिलकर लिखी थी। फिल्म में स्मिता पाटिल लीड एक्ट्रेस के रूप में नजर आई थीं, जबकि गिरीश कर्नाड ने डॉक्टर राव का अहम किरदार निभाया था। इसके अलावा नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा और अमरीश पुरी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने फिल्म को अपनी दमदार अदाकारी से मजबूती दी थी।

‘मंथन’ की कहानी गुजरात के किसानों और उनके दूध के व्यापार पर आधारित थी। फिल्म का प्लॉट गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन से प्रेरित था, जिसने बाद में अमूल जैसे सफल कोऑपरेटिव मॉडल को जन्म दिया। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे डेयरी मालिक किसानों का शोषण करते हैं और उन्हें उनके दूध की सही कीमत नहीं मिलती। इसके साथ ही फिल्म में जाति प्रथा और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को भी बेहद संवेदनशील तरीके से दर्शाया गया।

इस फिल्म की सबसे खास बात इसका फाइनेंसिंग मॉडल था। ‘मंथन’ को बनाने के लिए किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्टूडियो का सहारा नहीं लिया गया, बल्कि गुजरात के करीब 5 लाख किसानों ने 2-2 रुपये का चंदा देकर इस फिल्म को फाइनेंस किया था। यही वजह है कि इसे भारत की पहली क्राउड फंडेड फिल्म कहा जाता है। फिल्म की शुरुआत में ही स्क्रीन पर लिखा आता है कि यह फिल्म गुजरात के 5 लाख किसानों द्वारा प्रस्तुत की गई है, जो इसे और भी खास बना देता है।

फिल्म में स्मिता पाटिल ने बिंदु नाम की एक गरीब लेकिन आत्मनिर्भर महिला का किरदार निभाया था, जो दूध बेचकर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है। उनका यह किरदार कमजोर नहीं बल्कि संघर्षशील और सशक्त महिला की पहचान बन गया। स्मिता पाटिल की अदाकारी को उस समय खूब सराहा गया और आज भी इसे उनके बेहतरीन अभिनय में गिना जाता है।


  • मंथन को न सिर्फ दर्शकों का प्यार मिला, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला। फिल्म के लिए श्याम बेनेगल को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला, जबकि विजय तेंदुलकर ने बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किया। इसके अलावा फिल्म का गाना गाने वाली प्रीति सागर को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।

    48 साल बाद, मई 2024 में इस फिल्म को कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे एक बार फिर सराहना मिली। आज भी मंथन अपनी सामाजिक चेतना, सशक्त कहानी और अनोखे निर्माण के कारण उतनी ही प्रासंगिक और चर्चित है, जितनी रिलीज के समय थी।

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