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जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब मिलेगा? केंद्र से मिले संकेत, उमर अब्दुल्ला बोले-अब और इंतजार नहीं

February 18, 2026

नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर केंद्र सरकार (Central government) की ओर से अहम संकेत मिले हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) ने कहा है कि इस संबंध में फैसला एक प्रक्रिया के तहत होगा और लोगों को “जल्द ही अच्छी खबर” सुनने को मिल सकती है।

एक क्षेत्रीय कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मेघवाल ने इस मुद्दे को संवेदनशील बताते हुए कहा कि जब गृह मंत्री अमित शाह संसद में आश्वासन दे चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर को उसके अधिकार मिलेंगे, तो यह वादा पूरा किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में निर्णय की प्रक्रिया जारी है।



  • 2019 के फैसले के बाद से जारी है मांग
    अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने विशेष संवैधानिक प्रावधान हटाने के बाद तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन किया था। इसके तहत क्षेत्र को दो केंद्र शासित प्रदेशों-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया। तभी से क्षेत्रीय राजनीतिक दल लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठा रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पहले भी संसद में कह चुके हैं कि हालात सामान्य होने पर राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं हुई है।

    उमर अब्दुल्ला: “जब तक राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, संतुष्टि नहीं”
    कार्यक्रम में मौजूद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर केंद्र से लगातार संवाद कर रही है। उन्होंने कहा,
    “हममें से कोई भी तब तक संतुष्ट नहीं होगा, जब तक हमें राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता। प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इसमें काफी समय लग गया है।”

    मेघवाल के “जल्द अच्छी खबर” वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोग पिछले डेढ़ साल से ऐसी घोषणा का इंतजार कर रहे हैं और अब उम्मीद है कि यह इंतजार ज्यादा लंबा नहीं होगा।

    राजनीतिक और भावनात्मक मुद्दा बना राज्य का दर्जा
    विश्लेषकों का मानना है कि राज्य का दर्जा बहाली केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और भावनात्मक रूप से भी अहम मुद्दा बन चुका है। स्थानीय दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और पूर्ण राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देख रहे हैं।

    केंद्र सरकार की ओर से मिले ताज़ा संकेतों ने राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ा दी हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस “प्रक्रिया” को कब अंतिम निर्णय में बदलती है।

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