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पाकिस्तान, वेनेजुएला और अब ईरान… क्यों सवालों के घेरे में हैं चीन में बने हथियार?

March 03, 2026

नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों ने बीते एक दशक में चीन (China) से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदे हैं। कम कीमत, तेज डिलीवरी और आसान फाइनेंसिंग के चलते चीन रक्षा बाजार में तेजी से उभरा है। लेकिन हाल के वर्षों में पाकिस्तान, वेनेजुएला और ईरान (Pakistan, Venezuela and Iran) जैसे देशों में चीनी हथियारों की परफॉर्मेंस को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

पाकिस्तान में तकनीकी दिक्कतें
पाकिस्तान ने चीन से जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं। जेएफ-17 का निर्माण चीन की कंपनी Chengdu Aircraft Industry Group और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स ने मिलकर किया है, हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में समय-समय पर जेएफ-17 में इंजन और एवियोनिक्स से जुड़ी तकनीकी खामियों की चर्चा होती रही है। इसके अलावा, कुछ चीनी ड्रोन सिस्टम्स की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठे हैं।

एक समय जिसे “बैटल-टेस्टेड इनोवेशन” कहा जा रहा था, उसमें अब घटिया इंजीनियरिंग और कमजोर सॉफ्टवेयर दिखता है। पाकिस्तान में चीन पर निर्भर सेनाएं बेबस होकर देखती रहीं और भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने YLC-8E “एंटी-स्टील्थ” रडार और HQ-9 सिस्टम का नाश कर दिया। यूएस डेल्टा फोर्स के निकाले जाने के दौरान वेनेज़ुएला के JY-27A रडार और HQ-9 बंद थे। ईरान में चीन के सप्लाई किए गए HQ-9B डिफेंस सिस्टम F-35 स्टील्थ हमलों के सामने टूट गए।

बार-बार नाकामी से पता चलता है कि ये सिर्फ गड़बड़ियां नहीं हैं, बल्कि सिस्टम में खराबी की निशानी हैं। 7 मई, 2025 को भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।

इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने LoC पार किए बिना ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों और एयर-लॉन्च्ड हथियारों का इस्तेमाल करके नौ पाकिस्तानी मिलिट्री बेस और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी कैंपों पर सटीक हमले किए।

23 मिनट के इस मिशन में भारत की SEAD (दुश्मन के एयर डिफेंस को दबाने) की ताकत दिखाई गई, जिसने पाकिस्तान के चीन के दबदबे वाले डिफेंस को भी पीछे छोड़ दिया। अपने 82% हथियार चीन से खरीदने वाले पाकिस्तान ने लाहौर से 70 किमी. दक्षिण में चुनियन एयर बेस पर YLC-8E एंटी-स्टील्थ रडार लगाया। चीन ने दावा किया कि उसके रडार की डिटेक्शन रेंज 450 किमी. है, राफेल जैसे स्टील्थ टारगेट के लिए इसकी सेंसिटिविटी ज्यादा है और एंटी-जैमिंग है।

फिर भी IAF के ELM-2090U ग्रीन पाइन रडार और ग्रोलर जैसे EW (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर) ने इसे जाम कर दिया, जिससे ब्रह्मोस मिसाइलें बिना पता चले उस जगह को तबाह कर पाईं। लाहौर का HQ-9 SAM, जो रूस के S-300 सिस्टम जैसा था खराब इंटीग्रेशन और EW की कमजोरी की वजह से नाकाम रहा।



  • पाकिस्तान ने AR-1 लेजर-गाइडेड मिसाइलों से लैस विंग लूंग-II MALE UAVs से जवाब दिया, लेकिन भारत के आकाश-NG और MRSAM सिस्टम ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। PAF JF-17s से दागी गई PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल (चीन की PL-15 का एक्सपोर्ट वेरिएंट) चूक गई और भारत ने उसे सही-सलामत बरामद कर लिया। टुकड़ों से रॉकेट मोटर में कमियां और गाइडेंस सिस्टम की गलतियां सामने आईं।

    खराब स्टेल्थ डिटेक्शन (YLC-8E ने F-35 डिटेक्शन को बढ़ा-चढ़ाकर बताया लेकिन डिकॉय के सामने नाकाम रहा), धीमे सॉफ्टवेयर अपडेट और कोई असली कॉम्बैट हार्डनिंग नहीं। इन नाकामियों ने चीनी टेक्नोलॉजी की धज्जियां उड़ा दीं। भारत के देसी एयर डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में दबदबे ने चीन के बने सिस्टम को हरा दिया।

    ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस के कम ऊंचाई (10 मीटर ऊंचाई) से बचने और मल्टी-सेंसर फ्यूजन को सही साबित किया, जिससे बीजिंग का प्रोपेगैंडा खत्म हो गया।

    वेनेजुएला में मादुरो को पकड़ने वाला यूएस ऑपरेशन
    इसी तरह वेनेजुएला में भी चीनी हथियारों की नाकामी देखी गई। जनवरी 2026 में अमेरिका ने “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” शुरू किया। ये ऑपरेशन काराकस में आधी रात को किया गया, जिसमें वेनेज़ुएला के ताकतवर नेता निकोलस मादुरो को बिना कोई गोली चलाए घर से निकाल लिया गया।

    स्टेल्थ MH-60M ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर के जरिए डेल्टा फोर्स की टीमों ने चीनी और रूसी डिफेंस की भूलभुलैया के बीच से टारगेट को निकाला, जिससे बीजिंग का हथियारों का जखीरा ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

    वेनेज़ुएला का एयर डिफेंस की खूब वाहवाही हो रही थी लेकिन काबिलियत की कमी थी। 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के निवेश के बावजूद एक भी अमेरिकी सैनिक को पकड़ा नहीं जा सका। वेनेज़ुएला के एयर डिफेंस की रीढ़ कहे जाने वाले चीनी JY-27A “मीटर-वेव” एंटी-स्टील्थ रडार फेल हो गए थे। 2019 से खरीदे गए वेनेजुएला के 22 चीनी रडार में से 60% से ज्यादा रेड से पहले ऑफलाइन थे।

    जंग, पावर सर्ज और अनट्रेंड क्रू ने JY-27V वेरिएंट को कबाड़ बना दिया। रेड में HQ-9 गाइडेंस सेक्शन भी सही-सलामत मिले। एनालिसिस से पता चला कि डिटेक्शन सिस्टम एडवांस्ड जैमर के लिए बहुत कमज़ोर था और फायर-कंट्रोल सॉफ्टवेयर में लैग था।
    ईरान में HQ-9B की नाकामी

    यूएस-इजरायल के चल रहे हवाई हमलों ने चीन में बने हथियारों की कमियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। 2025 में रूसी S-300 के इजरायली F-35 के सामने फेल होने के बाद खरीदे गए चीन के HQ-9B SAM ने एक्टिव रडार के साथ 260 किमी. की एंगेजमेंट रेंज का वादा किया था।

    असलियत में स्टेल्थ F-35 और AGM-158C LRASM स्टैंड-ऑफ हथियारों के हमले के बीच इसका पता ही नहीं चला। HQ-9B के टारगेटिंग सीकर और दो-स्टेज वाले रॉकेट मोटर, इजरायली ALQ-322 जैमिंग डिवाइस का सामना नहीं कर सके।

    इसके रडार कवरेज में बड़े छेदों की वजह से चुपके से F-35s 50 नॉटिकल मील के अंदर बिना पता चले आ गए। साइड-रडार क्लीनअप कमजोर था और सिग्नल बदलने में भी धीरे-धीरे बदलाव होते थे (सख्त पैटर्न में फंस जाते थे)।

    30 मीटर ऊंचाई पर समुद्र में उड़ने वाली टॉमहॉक मिसाइलें HQ-9 की फिक्स्ड लॉन्च पोजीशन से ब्लाइंड स्पॉट को पार कर गईं। मलबे से पता चला कि सीकर्स के जैमिंग डिफेंस यूएस वाइड-बैंड जैमर (10-40GHz ब्लास्ट) के खिलाफ कमजोर थे, ठीक वैसे ही जैसे ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का HQ-9 फेल हुआ था।

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