नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi ) 7 और 8 फरवरी को दक्षिण-पूर्व एशियाई मुस्लिम देश मलेशिया (Malaysia) के आधिकारिक दौरे पर रवाना होंगे। यह यात्रा मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हो रही है और ऐसे वक्त में हो रही है, जब भारत–मलेशिया संबंध एक नए रणनीतिक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी और अगस्त 2024 में अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के बाद पहली द्विपक्षीय उच्चस्तरीय मुलाकात है।
पीएम मोदी की यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने आखिरी बार 2015 में मलेशिया का दौरा किया था, जब दोनों देशों ने रिश्तों को Enhanced Strategic Partnership तक अपग्रेड किया था। इसके बाद अगस्त 2024 में अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के दौरान संबंधों को और आगे बढ़ाते हुए Comprehensive Strategic Partnership का दर्जा दिया गया।
साझेदारी की प्रगति और भविष्य का रोडमैप
इस दौरे के दौरान दोनों नेता अगस्त 2024 में शुरू हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे और आने वाले वर्षों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तय करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की मलेशियाई नेतृत्व से मुलाकात के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह यात्रा भारत की Act East Policy और ASEAN देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
मोदी–अनवर वार्ता: किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की संयुक्त समीक्षा पर चर्चा होने की उम्मीद है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाया जा सके। वर्तमान में मलेशिया ASEAN क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 20 अरब डॉलर का है।
इसके अलावा, भारत और मलेशिया सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बहुस्तरीय सहयोग व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिसे इस यात्रा की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
बातचीत का प्रमुख एजेंडा
प्रधानमंत्री मोदी और अनवर इब्राहिम के बीच
व्यापार और निवेश
रक्षा और सुरक्षा
सेमीकंडक्टर और डिजिटल टेक्नोलॉजी
नवीकरणीय ऊर्जा
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा
जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा होगी। इस दौरान कुआलालंपुर में भारत–मलेशिया CEO फोरम की 10वीं बैठक भी आयोजित की जाएगी। पीएम मोदी प्रमुख मलेशियाई उद्योगपतियों और CEOs से मुलाकात कर व्यापार व निवेश के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री संबोधित कर सकते हैं।
डिजिटल भुगतान और रक्षा सहयोग पर समझौते संभव
यात्रा के दौरान रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा। आपदा प्रबंधन और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा (UN Peacekeeping) जैसे क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर की संभावना है।
स्टार्टअप और नवाचार में साझेदारी पर भी बातचीत होगी। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि भारत की नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन (NPCI) के जरिए डिजिटल भुगतान से जुड़े एक अहम समझौते पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिसे यात्रा की प्रमुख उपलब्धि माना जा रहा है।
भारत ने साफ किया है कि प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान वांछित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण समेत द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने बताया कि प्रत्यर्पण को लेकर पहले भी अलग-अलग स्तरों पर बातचीत होती रही है और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने तक भारत इस मुद्दे को उठाता रहेगा।
क्यों अहम है यह दौरा?
प्रधानमंत्री मोदी का मलेशिया दौरा सिर्फ औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं है। यह
Act East Policy को मजबूती
ASEAN क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी
टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग
और लोगों से लोगों के रिश्तों को और गहरा करने
की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत–मलेशिया संबंधों को रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक—तीनों मोर्चों पर नई गति देने वाली साबित हो सकती है।

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