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क्या भारत पर नहीं लगेगा 500 प्रतिशत टैरिफ? रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिकी वित्त मंत्री का बड़ा एलान

January 21, 2026

वॉशिंगटन. अमेरिकी वित्त मंत्री (US Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट (Scott Basant) ने मंगलवार को इशारा किया कि भारत (India) पर रूसी तेल (Russian oil) खरीद को लेकर 500 फीसदी टैरिफ (500 percent tariff) नहीं लगेगा। स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार को दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन चीन जैसे अन्य खरीदारों पर कहीं ज्यादा बड़ा दंड लगाने पर विचार कर रहा है।

फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में स्कॉट बेसेंट ने कहा, ‘संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू किया। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है और उसे बंद कर दिया है।’


  • रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ का विधेयक
    स्कॉट बेसेंट प्रस्तावित रूस प्रतिबंध विधेयक के बारे में बोल रहे थे, जो अमेरिका को रूसी तेल खरीदना जारी रखने वाले देशों पर कम से कम 500 प्रतिशत का शुल्क लगाने की अनुमति देगा। लिंडसे ग्राहम की ओर से तैयार किए गए इस विधेयक को ट्रंप ने राजनीतिक रूप से मंजूरी दे दी है, हालांकि यह अभी भी सीनेट के सामने है।

    क्या भारत पर लगेगा 500 प्रतिशत टैरिफ?
    बेसेंट ने कहा, ‘रूसी तेल के खरीदारों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने सीनेट के सामने रखा है। हमारा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस अधिकार की जरूरत नहीं है। वे इसे आईईपीए के तहत कर सकते हैं, लेकिन सीनेट उन्हें यह अधिकार देना चाहती है।’ वहीं, विधेयक बनाने वाले लिंडसे ग्राहम का कहना है कि यह कानून ट्रंप को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर जबरदस्त दबाव बनाने की शक्ति देगा। पिछले साल अक्टूबर में, बेसेंट ने दावा किया था कि अमेरिका के 85 सीनेटर ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले चीन पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने को तैयार हैं।

    क्या तेल खरीद से चीन कर रहा यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद?
    अमेरिकी वित्त मंत्री ने यूरोपीय देशों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘चार साल बाद भी यूरोप रूस से तेल खरीद रहा है। वे अपने ही खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित कर रहे हैं।’
    अमेरिका के निशाने पर मुख्य रूप से चीन है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में चीन का नाम शामिल है।
    अमेरिकी अधिकारियों की ओर से लगातार यह तर्क दिया जाता है कि रियायती दरों पर रूसी तेल की चीनी खरीद यूक्रेन में मॉस्को के युद्ध प्रयासों को वित्तपोषित करने में मदद कर रही है।

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