
डेस्क: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए उस महिला (Women) को बरी कर दिया, जिस पर अपनी बहू (Daughter-in-Law) के साथ दहेज (Dowry) को लेकर उत्पीड़न करने का आरोप था. कोर्ट ने कहा कि ससुराल वालों द्वारा दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित किए जाने की बात हवा से भी तेज फैलती है. कोर्ट ने अपर्याप्त सबूत होने की वजह से महिला को बरी कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) के फैसले के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सुनाया, जिसमें इस महिला को हाई कोर्ट ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने की.
महिला को भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत दोषी ठहराया गया था. आरोप था कि उसकी मृत पुत्रवधू ने अपने परिवार वालों को दहेज के लिए उत्पीड़न का सामना करने की जानकारी दी थी. दरअसल, भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए ऐसे मामले से संबंधित है, जिसमें किसी महिला के खिलाफ उसके ससुराल वाले दहेज के लिए मारपीट करते हों.
इस मामले में गवाह एक पड़ोसन थी, जिसके पास कोर्ट में यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे कि पीड़िता ने आत्महत्या दहेज की वजह से ही की थी. पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि उसके साक्ष्य को लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य पेश नहीं कर सकती थी, क्योंकि यह चारदीवारी के भीतर होता है, जो एक गलत तर्क है. उन्होंने कहा कि खासकर ऐसे मामलों में जब सास-ससुर द्वारा दहेज के लिए बहू को परेशान किए जाने की बात हवा से भी तेजी से फैलती है.
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