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अमेरिका के 18,617 द्वीपों की दुनिया, न्यूयॉर्क की चमक से दूर जिंदगी, जहां जहाजों से पहुंचता है राशन

October 18, 2026

न्यूयॉर्क। अमेरिका (America) का नाम सुनते ही न्यूयॉर्क (New York) की ऊंची इमारतें, वॉल स्ट्रीट की कारोबारी दुनिया और वॉशिंगटन डीसी (Washington, D.C.) के सत्ता केंद्रों की तस्वीर सामने आती है। आम धारणा है कि अमेरिका में आधुनिक सड़कें, तेज परिवहन और तकनीक से लैस सुविधाएं हर जगह उपलब्ध हैं। लेकिन देश की भौगोलिक सीमाओं से जुड़ी एक दूसरी दुनिया भी है, जहां जीवन की रफ्तार बड़े शहरों से बिल्कुल अलग है। ये हैं अमेरिका के दूर-दराज के द्वीप, जहां समुद्र, मौसम और सीमित संसाधन रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कुल 18,617 द्वीप हैं। प्रशांत महासागर से लेकर आर्कटिक क्षेत्र तक फैले इन द्वीपों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। मुख्यभूमि के बड़े शहरों में जहां सामान और सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं, वहीं कई दूरस्थ द्वीपों पर जरूरी चीजों की आपूर्ति मौसम और समुद्री परिवहन पर निर्भर करती है।

जहाजों और छोटे विमानों पर निर्भर जिंदगी
अलास्का के एल्यूशियन द्वीपसमूह और प्रशांत महासागर के कई छोटे द्वीपों तक सामान पहुंचाना आसान नहीं है। यहां मुख्यभूमि की तरह चौड़े हाईवे और सड़क परिवहन का व्यापक नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। ताजी सब्जियां, दूध, दवाइयां और ईंधन जैसी जरूरी वस्तुएं जहाजों या छोटे विमानों के जरिए पहुंचाई जाती हैं।

समुद्र में खराब मौसम, तेज हवाओं या घने कोहरे के कारण परिवहन प्रभावित हो जाए, तो सामान की आपूर्ति में देरी हो सकती है। ऐसे में स्थानीय बाजारों में जरूरी वस्तुओं की कमी पैदा होने का खतरा रहता है। लंबी दूरी और परिवहन की अधिक लागत का असर भी कीमतों पर पड़ता है। कुछ दूरस्थ द्वीपों पर ब्रेड, दूध और दूसरी दैनिक जरूरतों की वस्तुएं मुख्यभूमि के मुकाबले काफी महंगी मिल सकती हैं।


  • इन इलाकों में बिजली और पीने के पानी की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती है। जहां केंद्रीय बिजली ग्रिड नहीं पहुंच पाया है, वहां डीजल जनरेटर, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाता है। पीने के पानी के लिए बारिश के पानी को जमा करने और समुद्री पानी को शुद्ध करने वाली तकनीक पर निर्भरता भी देखने को मिलती है।

    अमेरिकी नागरिक, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में वोट का अधिकार हर जगह नहीं
    अमेरिका के कुछ द्वीपीय क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति भी मुख्यभूमि के राज्यों से अलग है। प्यूर्टो रिको, गुआम, अमेरिकी वर्जिन द्वीपसमूह और नॉर्दर्न मारियाना द्वीपसमूह जैसे क्षेत्रों के नागरिकों के अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व एक जैसे नहीं हैं।

    गुआम, अमेरिकी वर्जिन द्वीपसमूह और नॉर्दर्न मारियाना द्वीपसमूह में जन्म लेने वाले अधिकांश लोग अमेरिकी नागरिक होते हैं। प्यूर्टो रिको में जन्म लेने वाले लोग भी सामान्यतः अमेरिकी नागरिक होते हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को अमेरिकी राष्ट्रपति के आम चुनाव में मतदान का समान अधिकार नहीं मिलता।

    अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में किसी राज्य के निवासी के रूप में मतदान करने के लिए सामान्यतः उस राज्य में निवास की पात्रता जरूरी होती है। प्यूर्टो रिको, गुआम, अमेरिकी वर्जिन द्वीपसमूह और नॉर्दर्न मारियाना द्वीपसमूह में रहने वाले लोग वहां से राष्ट्रपति के आम चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। लेकिन यदि वे किसी अमेरिकी राज्य या कोलंबिया जिले में जाकर वहां के मतदान संबंधी नियमों के अनुसार पात्रता हासिल कर लें, तो मतदान कर सकते हैं।

    अमेरिकी कांग्रेस में भी इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व राज्यों से अलग है। इनके प्रतिनिधि सदन में प्रतिनिधि या डेलीगेट के रूप में हिस्सा लेते हैं, लेकिन उन्हें सदन के अंतिम मतदान में राज्यों के पूर्ण मतदान अधिकार वाले सदस्यों जैसी शक्ति हासिल नहीं होती। इन क्षेत्रों के राजनीतिक दर्जे और प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है।

    अमेरिका की समुद्री ताकत में द्वीपों की बड़ी भूमिका
    दूरस्थ द्वीपों पर परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों के बावजूद इनका रणनीतिक महत्व बेहद बड़ा है। अमेरिका के द्वीप और दूसरे समुद्री क्षेत्र उसकी सुरक्षा, सैन्य मौजूदगी और समुद्री संसाधनों तक पहुंच में अहम भूमिका निभाते हैं।

    अमेरिका का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) समुद्र में उसके अधिकारों का बड़ा दायरा तय करता है। इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अमेरिका को प्राकृतिक संसाधनों की खोज, दोहन और प्रबंधन के विशेष अधिकार मिलते हैं। इसमें मत्स्य संसाधन, समुद्र तल के खनिज और ऊर्जा संसाधन शामिल हैं। हालांकि, EEZ का अर्थ समुद्र के सभी संसाधनों पर पूर्ण संप्रभुता या एकाधिकार नहीं है।

    प्रशांत महासागर में गुआम और हवाई जैसे स्थान अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका को समुद्र के विशाल क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने में मदद करती है। इस तरह, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन जहां देश की आर्थिक और राजनीतिक ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं दूर-दराज के द्वीप उसकी समुद्री रणनीति और वैश्विक प्रभाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

    द्वीपों की संख्या में स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड आगे
    अमेरिका के 18 हजार से अधिक द्वीपों का आंकड़ा बड़ा जरूर है, लेकिन दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां द्वीपों की संख्या इससे कहीं अधिक है। स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड जैसे नॉर्डिक देशों में हजारों नहीं, बल्कि लाखों द्वीप गिने जाते हैं।

    उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों में स्वीडन के करीब 2.67 लाख, नॉर्वे के लगभग 2.39 लाख और फिनलैंड के करीब 1.79 लाख द्वीप बताए जाते हैं। कनाडा में भी 52 हजार से अधिक द्वीप हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों में द्वीपों की गणना के तरीके और किसी भूभाग को द्वीप मानने के मानदंड अलग हो सकते हैं, इसलिए इन आंकड़ों की सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए।

    इन देशों में द्वीपों की बड़ी संख्या के पीछे हिमयुग का भी योगदान है। ग्लेशियरों के खिसकने और पिघलने से चट्टानी भूभागों में कटाव हुआ और समुद्र तथा झीलों के किनारे अनेक छोटे-बड़े द्वीप बने। खासकर स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड के तटीय क्षेत्रों में इस भूगर्भीय प्रक्रिया के निशान आज भी दिखाई देते हैं।

    भारत के पास भी हैं 1,382 द्वीप
    द्वीपों की इस वैश्विक तस्वीर में भारत भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास कुल 1,382 द्वीप हैं। इनमें बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के 572 द्वीप और अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप के 36 द्वीप शामिल हैं। इसके अलावा भारत के तटीय राज्यों और नदियों में भी कई द्वीप हैं। असम का माजुली इसका प्रमुख उदाहरण है।

    इनमें से कई द्वीप निर्जन हैं या उन पर आबादी बहुत कम है। कुछ क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय समुदायों की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हैं। ऐसे इलाकों में विकास गतिविधियों को स्थानीय पारिस्थितिकी और समुदायों के अधिकारों को ध्यान में रखकर संचालित करना जरूरी होता है।

    भारत की करीब 7,517 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा और उसके द्वीप राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अहम हैं। इनकी वजह से भारत को समुद्र में विस्तृत विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र मिलता है, जहां देश को प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल और प्रबंधन के विशेष अधिकार हासिल हैं।

    इस तरह, अमेरिका के हजारों द्वीप हों या भारत के समुद्री और नदी द्वीप, उनका महत्व केवल भूगोल तक सीमित नहीं है। ये क्षेत्र स्थानीय जीवनशैली, पर्यावरण, व्यापार, प्राकृतिक संसाधनों और राष्ट्रीय सुरक्षा से गहराई से जुड़े हैं। बड़े शहरों की चमक से दूर बसे इन द्वीपों की दुनिया यह भी दिखाती है कि किसी देश की असली तस्वीर केवल उसके महानगरों से नहीं, बल्कि दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन और चुनौतियों से भी बनती है।

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