
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के संबंधों में गिरावट देखने को मिली थी। मानवता के नाम पर भारत जिस सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) का पालन करता आया था, उसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद रद्द कर दिया गया। पाकिस्तान की ओर से इसका विरोध किया गया, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि यह संधि केवल शांति काल के लिए थी। अगर पाकिस्तान शांति स्थापित नहीं करना चाहता, तो यह संधि भी नहीं रहेगी। इसी क्रम में अब जम्मू-कश्मीर सरकार चार दशक से बंद पड़ी वुलर बैराज परियोजना को फिर से शुरू करने जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य झेलम नदी के पानी का भंडारण और प्रवाह नियंत्रित करना है।
संधि के कारण ठंडे बस्ते में गई परियोजना
भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार ने पहले सिंधु जल संधि को ध्यान में रखते हुए वुलर बैराज परियोजना को रोक दिया था। अब जबकि यह संधि निलंबित हो गई है, स्थानीय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार इसे दोबारा शुरू करने जा रही है। अधिकारियों के अनुसार केंद्र और प्रदेश सरकार जल्द ही मिलकर इस परियोजना पर काम शुरू करेंगे।
वुलर झील की वर्तमान स्थिति
ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद वुलर बैराज झील एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा था कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है—अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर के लिए जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल परियोजना (वुलर बैराज)। इस परियोजना के लिए पहले एशियाई विकास बैंक से धनराशि मिली थी, लेकिन संधि के कारण इसे रोक दिया गया। झील का आकार झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार बदलता रहता है। न्यूनतम आकार 20 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम लगभग 190 वर्ग किलोमीटर है।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें
स्थानीय लोगों को इस बैराज के बनने से रोजगार और आजीविका में सुधार की उम्मीद है। सर्दियों में झेलम नदी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे वुलर झील के अधिकांश हिस्से सूख जाते हैं। स्थानीय मछुआरे और किसान झील में नावों का उपयोग करके मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने का काम करते रहे हैं। परियोजना शुरू होने से उनकी पारंपरिक आजीविका को फिर से सहारा मिलेगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान ने लगातार बयान जारी किए और चेतावनी दी कि यदि पानी रोका गया तो इसे युद्ध के समान समझा जाएगा। हालांकि भारत ने अपने फैसले पर कायम रहते हुए केंद्र और राज्य सरकार को इस परियोजना पर जल्द काम शुरू करने का आदेश दिया है।
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