बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अब डॉलर (Dollar) के वर्चस्व का दौर समाप्ति की ओर है और दुनिया को एक ऐसी मुद्रा की जरूरत है, जिस पर वैश्विक अस्थिरता के दौर में भरोसा किया जा सके। जिनपिंग के मुताबिक चीन इसी लक्ष्य के तहत युआन को वैश्विक रिजर्व करेंसी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अपने भाषण में शी जिनपिंग ने कहा कि किसी भी देश को आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए सिर्फ मजबूत उद्योग या तकनीक ही नहीं, बल्कि ऐसी मुद्रा भी चाहिए जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास हो और जिसका व्यापक उपयोग हो। उन्होंने जोर दिया कि इसके लिए एक सक्षम केंद्रीय बैंक, प्रभावी मौद्रिक नीति और मजबूत मैक्रो प्रूडेंशियल प्रबंधन बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही जिनपिंग ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वित्तीय संस्थान और ऐसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र भी विकसित करने होंगे, जो दुनिया भर की पूंजी को आकर्षित कर सकें और वैश्विक बाजार की कीमतों को प्रभावित करने की क्षमता रखें।
भाषण की टाइमिंग ने बढ़ाई हलचल
राष्ट्रपति शी का यह भाषण चीनी पत्रिका ‘चिउशी’ में शनिवार को प्रकाशित हुआ। खास बात यह है कि यह भाषण उन्होंने वर्ष 2024 में दिया था, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में इसका प्रकाशन बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका, खासतौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ा सकता है।
डॉलर को चुनौती और ब्रिक्स की भूमिका
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले देशों पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने भारत, चीन और रूस के नेतृत्व वाले ब्रिक्स समूह पर डॉलर के विकल्प तलाशने के आरोप में 100 फीसदी टैरिफ तक की धमकी दी थी।
हालांकि भारत समेत ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्प खोज रहे हैं। इसी दिशा में ब्रिक्स समूह एक साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम लॉन्च करने की तैयारी में भी जुटा है।
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