
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण (Governor’s Address) पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शिक्षा विभाग (Education Department) में प्रशासनिक अव्यवस्था और गंभीरता की कमी का जिक्र करते हुए एक मज़ेदार लेकिन चौंकाने वाला किस्सा (funny yet shocking incident) साझा किया।
सीएम ने बताया कि सपा के माध्यमिक शिक्षा मंत्री पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां के बीच अंतर नहीं कर पाए थे। स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस के मौके पर मंत्री ने कार्यक्रम में पूछा कि बिस्मिल्लाह खां को फांसी कैसे दी जा सकती है। जब किसी ने उन्हें टोका कि बात पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की है, तो मंत्री ने उस व्यक्ति पर भाजपा समर्थक होने का आरोप लगा दिया।
योगी ने यह घटना गोरखपुर में अपने सांसद समय की याद करते हुए भी साझा की। उन्होंने बताया कि वहां एक रेलवे स्टेशन पर अधिकारी मंत्री को पहचान ही नहीं पाए थे क्योंकि वह छह महीने से अपने दफ्तर नहीं गए थे। इस घटना से शिक्षा विभाग में प्रशासनिक अव्यवस्था स्पष्ट हो गई थी।
सीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अंधेर नगरी, चौपट राजा जैसी स्थिति सपा शासनकाल में देखी गई थी। बच्चों की पढ़ाई और नकल रोकने की जिम्मेदारी को लेकर भी उन्होंने कटाक्ष किया।
इसके अलावा योगी ने कानून-व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। कुंभ मेले में नियमों के उल्लंघन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि चार पीठों की परंपरा और वेदों की मर्यादा, जिसे आदि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने स्थापित किया, का पालन अनिवार्य है।
इस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में सपा पर न केवल प्रशासनिक और शिक्षा व्यवस्था में असफलता का आरोप लगाया बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक जागरूकता की कमी पर भी कटाक्ष किया। इस किस्से और टिप्पणियों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और विपक्ष की छवि पर भी सवाल उठाए हैं।
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