
इंदौर। बीआरटीएस को तोडऩा नगर निगम के लिए खासा चुनौतीपूर्ण साबित हो गया। हाईकोर्ट की जहां लगातार फटकार खाना पड़ी, वहीं योग्य ठेकेदार फर्म का चयन करने और रैलिंग उखड़वाने और बस स्टैंड तुड़वाने में पसीने छूट गए। अभी जो नए सिरे से टेंडर बुलाए उसमें बस स्टॉप तोडऩे, उसका मलबा बेचने के साथ-साथ रैलिंग और बीम तोडऩे के लिए 15 टेंडर प्राप्त हुए हैं। अब अगले हफ्ते निगम इन टेंडरों को मंजूरी देगा, जिसमें एक बस स्टॉप तोडऩे के एवज में नगर निगम को 6 लाख 10 हजार रुपए की राशि का सबसे अधिक बोली वाला टेंडर भी प्राप्त हुआ है, जो कि एनर्जी इंजीनियरिंग द्वारा सौंपा गया है। वहीं रैलिंग उखाडऩे के लिए भी 5 टेंडर निगम को प्राप्त हुए हैं, इसमें भी एनर्जी इंजीनियरिंग ने ही सबसे अधिक राशि का टेंडर भरा है।
पहले मुख्यमंत्री और उसके बाद जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के चलते नीरंजनपुर से राजीव गांधी चौराहा तक बनाया गया साढ़े 11 किलोमीटर लम्बा बीआरटीएस कॉरिडोर समाप्त किया गया। उसके बाद बीआरटीएस को हटाने की प्रक्रिया निगम ने शुरू करवाई, जिसमें वह पूरी तरह से असफल साबित हुआ। 4 से 5 बार टेंडर बुलाना पड़े और बीच में ही काम छोडक़र ठेकेदार फर्म भाग खड़ी हुई, तो दूसरी तरफ हाईकोर्ट से भी लगातार फटकार निगम इस मामले में खाता रहा। कुछ दिनों पूर्व सेंटर डिवाइडर का काम शुरू करवाया। जनकार्य समिति प्रभारी राजेन्द्र राठौर के मुताबिक एलआईजी से लेकर नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनना है, लिहाजा इस हिस्से को छोडक़र शेष हिस्से में सेंट्रल डिवाइडर बनवाए जा रहे हैं, जिनके लिए दो ठेकेदार एजेंसियां चयनित की गई हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश पर ही एक तरफ की रैलिंग तो निकल गई है मगर दूसरी तरफ की रैलिंग के साथ -साथ अभी 16 बस स्टॉप भी इस साढ़े 11 किलोमीटर के हिस्से में कायम है। सिर्फ एक बस स्टॉप ही पुरानी ठेकेदार फर्म ने तोड़ा और उसका मलबा बेचा। अब निगम को रैलिंग उखाडऩे, बीम तोडऩे के लिए 5 फर्मों ने टेंडर सौंपे हैं, जिसमें किलोमीटर के आधार पर ठेका दिया जाएगा और स्क्रैप यानी जो लोहा या अन्य सामग्री निकलेगी उसे ठेकेदार फर्म बेच सकेगी। 5 लाख 10 हजार रुपए का टेंडर एनर्जी इंजीनियरिंग ने रैलिंग को लेकर दिया है, जो कि सर्वाधिक राशि का है। अन्य चार फर्मों ने तो सवा लाख रुपए से लेकर 2 लाख 51 हजार रुपए तक के रेट भरे हैं। वहीं दूसरी तरफ जो 16 बस स्टॉप हटाना है उनके लिए 10 फर्मों ने टेंडर सौंपे हैं। इसमें सर्वाधिक राशि 6 लाख 10 हजार प्रति बस स्टॉप एनर्जी इंजीनियरिंग द्वारा दी गई है।
इसके बाद बृजेश्वरी इन्फ्रास्ट्रक्चर ने सवा चार लाख रुपए, तो एसए इंटरप्राइजेस ने 3 लाख 11 हजार 786,पूजा इंटरप्राइजेस ने 1 लाख 90, अर्चित इंटरप्राइजेस ने 1 लाख 85 हजार और इतनी ही राशि का टेंडर ओमप्रकाश हरकचंद मित्तल ने भरा है। सातवां टेंडर 1 लाख 80 हजार का नवनिर्माण कम्पनी, 1 लाख 75 हजार का महादेव इन्फ्रास्ट्रक्चर, 1 लाख 65 हजार 786 की राशि का टेंडर ख्याति कंस्ट्रक्शन ने और सबसे कम सवा लाख रुपए प्रति बस स्टॉप का टेंडर तनीशा कंस्ट्रक्शन द्वारा सौंपा गया है। चूंकि रैलिंग निकालने और बस स्टॉप तोडऩे के दोनों कार्यों के टेंडर निगम ने अलग-अलग बुलवाए और कुल 15 टेंडर प्राप्त हुए हैं। इसमें सबसे अधिक राशि का बस स्टॉप तोडऩे का टेंडर एनर्जी इंजीनियरिंग ने भरा है। इसी तरह रैलिंग उखाडऩे का टेंडर भी 5 लाख 10 हजार रुपए की राशि का इसी एनर्जी इंजीनियरिंग का है। लिहाजा संभव है कि दोनों कार्य एक ही ठेकेदार फर्म को सौंपे जाएंगे। राठौर के मुताबिक अगले हफ्ते इन टेंडरों पर निर्णय होगा और उसके बाद काम भी शुरू करवा दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में भी निगम को जवाब देना है कि कब तक रैलिंग निकालने और बस स्टॉप को हटाने का काम पूरा हो जाएगा।
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