
केन्द्रीय परिवहन मंत्री गडकरी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दी ये जानकारी, 31 मार्च तक प्रोजेक्ट का आवंटन पूर्ण करने का भी दिलाया भरोसा
84 किलोमीटर का हाईवे दो पैकेजमें होगा निर्मित
5 हजार करोड़ की राशि खर्च होगी पूरे प्रोजेक्ट पर
दो रेलवे ओवरब्रिज के साथ एक दर्जन से अधिक बड़े पुल बनेंगे
सिक्सलेन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में 44 गांवों की जमीनें होंगी अधिग्रहित
एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे में जितना वाहन चलेगा उतना टोल लगेगा
इंदौर। पूर्वी बायपास (Eastern Bypass) के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (National Highway Authority) ने दो पैकेजों में निर्माण करना तय किया है। लगभग 5 हजार करोड़ (5 thousand crores) रुपए की राशि इस पूरे प्रोजेक्ट पर खर्च होगी और 84 किलोमीटर का सिक्स लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस कंट्रोल्ड हाईवे रहेगा और यह शिप्रा के पास से शुरू होकर सिमरोल होते हुए पीथमपुर तक निर्मित होगा और इससे इंदौर-देवास के 44 गांव जुड़ेंगे। अभी पिछले दिनों ही केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकरर पूर्वी बायपास के लिए भूमि अधिग्रहण लागत की 50 फीसदी राशि राज्य सरकार द्वारा वहन करने पर प्रसन्नता जाहिर की और कहा कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अपेराइजल कमेटी के पास संशोधित प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर दिया है और कैबिनेट की आवश्यक मंजूरी प्राप्त होने के साथ 31 मार्च तक प्रोजेक्ट का आबंटन पूर्ण किए जाने की भी संभावना है। 696 हेक्टेयर यानी 1720 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और एक अनुमान के मुताबिक लगभग 1200 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मुआवजे के रूप में देना पड़ेगी।
अभी पिछले दिनों ही इस पूर्वी बायपास की ड्राइंग-डिजाइन को नेशनल हाईवे ने अंतिम रूप दिया है और 84 किलोमीटर का यह हाईवे दो पैकेज में बनेगा, जिसमें पहले पैकेज में 49, तो दूसरे पैकेज में 35 किलोमीटर का सिक्स लेन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर बनेगा। पिछले दिनों ही नेशनल हाईवे ने इसके टेंडर भी जारी किए हैं और संभवत: इसी माह के अंत तक निर्माण एजेंसी यानी ठेकेदार कम्पनी भी तय हो जाएगी। क्षिप्रा के पास पीर कराडिय़ा से खंडवा रोड पर सिमरोल के पास दतोदा तक पहला पैकेज 49 किलोमीटर का बनेगा, जिसकी लागत लगभग ढाई हजार करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है और उसके बाद फिर यहीं से दूसरा पैकेज 35 किलोमीटर का शुरू हुआ, जो पीथमपुर के पास नांदेड़ तक निर्मित होगा, जिसमें 26 किलोमीटर के हाईवे निर्माण के साथ 9 किलोमीटर की मौजूदा सडक़ को भी शामिल किया जाएगा। इस तरह 33 किलोमीटर का यह दूसरा पैकेज पूरा होगा, जिसकी अनुमानित लागत डेढ़ हजार करोड़ रुपए तक आंकी गई है। नेशनल हाईवे का कहना है कि जितना वाहन चलेगा, उतना ही टोल चुकाना पड़ेगा। निर्धारित एंट्री और एग्जिट के जरिए ही हाईवे पर आया-जाया जा सकेगा। दो रेलवे ओवरब्रिज भी निर्मित होंगे, जिसमें पहला इंदौर-बुधनी लाइन पर, तो दूसरा महू-पातालपानी लाइन पर निर्मित किया जाएगा। इसके अलावा तीन बड़े क्रॉसिंग खुड़ैल, मोरोदहाट और सिमरौल पर होंगे और पहले पैकेज में 7 बड़े पुल नदी, नालों और अन्य जल स्त्रोतों में बनेंगे, तो दूसरे पैकेज में 2 बड़े पुल निर्मित किए जाएंगे। इस पूर्वी बायपास के निर्माण से पूरी रिंग तैयार होगी, क्योंकि अभी पश्चिमी बायपास का निर्माण भी चल रहा है। 6 प्रमुख तहसीलों से गुजरने वाले इस हाईवे से इंदौर के अलावा उज्जैन, मुंबई, अहमदाबाद जाने वालों को सीधे कनेक्टिविटी मिलेगी और इंदौर-देवास के 44 गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। दूसरी तरफ सिक्स लेन का ही पश्चिमी बायपास भी निर्मित किया जा रहा है, जो कि महू के पास एबी रोड से सांवेर होते हुए शिप्रा तक निर्मित होगा। 64 किलोमीटर के इस बायपास में 34 किलोमीटर का हिस्सा महू से हातोद तक रहेगा और दूसरा हिस्सा हातोद से क्षिप्रा तक निर्मित किया जाएगा और क्षिप्रा के बाद ही पूर्वी बायपास शुरू हो जाएगा। इस तरह पश्चिमी और पूर्वी बायपास के निर्मित होने से इंदौर को बड़ा फायदा होगा और पूरी रिंग तैयार हो जाएगी, क्योंकि वर्तमान बायपास पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है और तेजी से शहर का विस्तार बायपास की तरफ भी हुआ और होटल, मैरिज गार्डन, शॉपिंग मॉल से लेकर कई टाउनशिप और अन्य गतिविधियां मौजूद बायपास पर आ गई है, जिसके चलते पूर्वी और पश्चिमी बायपास के निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है और इंदौर के मास्टर प्लान में भी इसका प्रावधान किया गया है। हालांकि भूमि अधिग्रहण सहित अन्य चुनौतियां बाकी है।
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